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नसबंदी ऑपरेशन : लापरवाही लील गई 6 ज़िंदगी 54 की हालत गंभीर

Sterilization operation 6 death by negligence in critical condition 54बिलासपुर [ TNN ] स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही के कारण छत्तीसगढ़ में नसबंदी ऑपरेशन महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हुए। राज्य के बिलासपुर जिले के सकरी स्थित नेमीचंद जैन अस्पताल में तीन दिन पहले शनिवार को सरकारी नसबंदी शिविर में हुए ऑपरेशन के बाद सोमवार को 6 महिलाओं की मौत हो गई। वहीं, नसबंदी कराने वाली 54 महिलाओं को हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल, सिम्स और अपोलो में भर्ती कराया गया है। पीडित महिलाओं का अस्पताल आने का सिलसिला अब भी जारी है। घटना के सामने आते ही राज्य सरकार ने मृतक महिलाओं के परिजनों को दो-दो लाख और बीमार महिलाओं को 50-50 हजार रूपए मुआवजा देने का ऎलान किया गया है।

शिविर के बाद बिगड़ी सेहत: परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत 8 नवंबर को सकरी के नेमीचंद जैन हॉस्पिटल में नसबंदी शिविर आयोजित हुआ था। इसमें तखपतपुर ब्लॉक की 83 महिलाएं नसबंदी ऑपरेशन के लिए पहुंची थीं। सुबह उन्हें बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया। जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. आर.के. गुप्ता ने दूरबीन पद्धति (लेप्रोस्कोपिक टयूबेक्टॉमी) से इनका ऑपरेशन किया। फिर इन्हें दवाइयां देकर छुट्टी दे दी गई। घर पहंुचते ही महिलाओं को उल्टियां होने लगीं।

परिजनों ने पहले तो इसे सामान्य तौर पर लिया, लेकिन रविवार को भी महिलाओं की स्थिति नहीं सुधरी। हालत बिगड़ने पर रविवार शाम तक एक-एक कर 28 महिलाओं को संजीवनी एक्सपे्रस से जिला अस्पताल पहंुचाया गया। गंभीर हालत में सुमेदा व रजनी बाई को सिम्स रेफर किया गया है।

ये ऑपरेशन बिलासपुर जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. आर.के. गुप्ता की देख रेख में हुए । इन्हें गत 26 जनवरी को 50 हजार ऑपरेशन का लक्ष्य पूरा करने पर पुरस्कृत किया गया था। डॉ. गुप्ता का कहना है कि इस ऑपरेशन में भी कोई कमी नहीं हुई। महिलाओं की तबीयत दवा खाने से खराब हुई है। दवा में क्या कमी थी, इसका पता लगाया जा रहा है।

बिलासपुर के चिकित्सक जिला अस्पताल डॉ. आर.के. शुक्ला के अनुसार दोनों महिलाओं का पोस्टमार्टम मैंने किया है। उनकी मौत शॉक से हुई है। लगातार उल्टी व घबराहट के चलते ऎसा हुआ होगा। इसके साथ आगे की जांच के लिए बिसरा रिपोर्ट भेज दी गई है।

नसबंदी शिविर में महिलाओं को बेहोशी के लिए एट्रोपिन, फोर्टविन व डायजेपॉम मिली दवा का एक एमएल इंजेक्शन दिया गया। ऑपरेशन के बाद सभी को सिप्रोसीन व ब्ा्रूफिन की टेबलेट बांटी गईंं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन दवाओं के खाने से महिलाएं बीमार हुई। इस मामले में स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। ऑपरेशन से पहले वहां एनेस्थिसिया देने के लिए डॉक्टर नहीं था। उन्हें ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों ने ही एनेस्थिसिया दिया। यह भी सामने आया है कि चिकित्सकों ने नसबंदी कराने वाली महिलाओं को दवाओं के सेवन के बारे में भी पूरी जानकारी नहीं दी।

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