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नसबंदी कांड : चूहे मार दवा ने उजाड़ दी 18 जिंदगियां

Sterilization operation 6 death by negligence in critical condition 54 बिलासपुर [ TNN ] छत्‍तीसगढ़ में 18 महिलाओं की जिंदगी निगल चुके नसबंदी कांड में नया खुलासा हुआ है। मामले की जांच कर रही कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बताया गया है कि पीड़ित महिलाओं को ऑपरेशन के बाद ऐसी दवाएं दी गई थी, जिनमें जिंक फॉस्फाइड मिलाया गया था। जिंक फॉस्फाइड का इस्तेमाल चूहे मारने के लिए किया जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नसबंदी शिविरों में महिलाओं को सिप्रोप्रोक्सिन-500 नामक दवा दी गई थी। अंदेशा जताया जा रहा है कि उस दवा के कारण ही महिलाओं की हालत खराब हुई।

बिलासपुर के मंडल आयुक्त सोनमणि बोरा ने बताया कि सिप्रोप्रोक्सिन-500 की गोलियों में जिंक फॉस्फाइड के अंश पाए गए हैं। दवा का निर्माण महावर फॉर्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने किया था।

बोरा ने बताया कि नसबंदी के बाद महिलाओं को वही दवा दी गई थी। विशेषज्ञों को कहना है कि जिंक फॉस्फाइड का इस्तेमाल चूहे आदि को मारने के लिए किया जाता है।

यदि चूहे या गिलहरी आदि जिंक फॉस्फाइड का सेवन कर लें तो ‌पाचन तंत्र के मौजूद एसिड उससे क्रिया करके जहरीली फॉस्फीन गैस बना लेता है, जो जानलेवा होती है। मनुष्य पर भी ये रसायन वैसा ही प्रभाव डालता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जहरीली फॉस्फीन गैस फेफड़े, ‌लीवर, किडनी और दिल को नुकसान पहुंचाती है। वहीं, सिप्रोप्रोक्सिन-500 की आपूर्ति करने वाली संदिग्ध महावर फॉर्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के मालिक पिता-पुत्र को गिरफ्तार करके सात दिन की रिमांड पर भेज दिया गया है।

महावर फार्मा के मालिक पिता-पुत्र रमेश महावर और सुमित महावर को रायपुर की पंडरी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। महावर फार्मा की सभी दवाएं प्रतिबंधित कर दी गई हैं। रमेश और सुमित के खिलाफ खाद्य और दवा प्रशासन (एफडीए) की ओर से गुरुवार को शिकायत दर्ज कराई गई थी। एफडीए ने गुरुवार को को महावर फार्मा कंपनी की उत्पादन इकाई को सील कर दिया था।

महावर फार्मा की कई दवाएं पहले से प्रतिबंधित थीं। कंपनी के खिलाफ इस मामले में विभिन्न अदालतों में मुकदमे भी चल रहे हैं। इसके बावजूद कंपनी की दूसरी दवाएं बाजार में बेरोकटोक बिक रही थीं।

जबकि वर्ष 2012 में विधानसभा में रमन सिंह सरकार ने जानकारी दी थी कि 25 कंपनियों की विभिन्न दवाएं प्रतिबंधित कर दी गई हैं उन कंपनियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। महावर फार्मा भी उस सूची में थी।

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