अयोध्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जाने बड़ी बाते


वर्षों से लंबित राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है। इस भूमि विवाद में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई फैसला पढ़ रहे हैं। पूरा फैसला आने में करीब आधे घंटे का वक्त लगेगा। आखिर में साफ होगा कि पीठ का अंतिम निर्णय क्या है। इससे पहले यह जान लीजिए कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आज जो फैसला दे रही है, वह 2.77 एकड़ जमीन से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट जमीन के इस हिस्से का मालिकाना हक तय करेगा। आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जज क्या फैसला दे रहे हैं…

ASI के सबूतों की अनदेखी नहीं: SC
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ASI की खुदाई से निकले सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला पूरी पारदर्शिता से हुआ है। कोर्ट ने कहा है कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। कोर्ट ने कहा कि मस्जिद के नीचे विशाल रचना थी। एएसआई ने 12वीं सदी का मंदिर बताया था। कोर्ट ने कहा कि कलाकृतियां जो मिली थीं, वह इस्लामिक नहीं थीं। विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीजें इस्तेमाल की गईं। मुस्लिम पक्ष लगातार कह रहा था कि ASI की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

‘अयोध्या में राम के जन्मस्थान के दावे का विरोध नहीं’
कोर्ट ने कहा है कि ASI नहीं बता पाया कि मस्जिद तोड़कर मंदिर बनी थी। अयोध्या में राम के जन्मस्थान के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया। विवादित जगह पर हिंदू पूजा करते रहे थे। गवाहों के क्रॉस एग्जामिनेशन से हिंदू दावा गलत साबित नहीं। हिंदू मुख्य गुंबद को ही राम जन्म का सही स्थान मनाते हैं।

‘मस्जिद कब बनी, इससे फर्क नहीं’
शिया बनाम सुन्नी केस में एक मत से फैसला आया है। शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि मस्जिद कब बनी, इससे फर्क नहीं पड़ता। 22-23 दिसंबर 1949 को मूर्ति रखी गई। एक व्यक्ति की आस्था दूसरे का अधिकार न छीने। नमाज पढ़ने की जगह को हम मस्जिद मानने से मना नहीं कर सकते। जज ने कहा कि जगह सरकारी जमीन है।

हिंदू पक्ष निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज हो गई है। हाई कोर्ट ने इस पक्ष को एक तिहाई हिस्सा दिया था। रामलला को कोर्ट ने मुख्य पक्षकार माना है। निर्मोही अखाड़ा सेवादार भी नहीं है। SC ने रामलला को कानूनी मान्यता दे दी है।
इससे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत सभी पांचों जजों के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले ही उनके घरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। कोर्ट परिसर में भी सुरक्षा काफी कड़ी है। सुबह के 10 बजते-बजते कोर्ट रूम नंबर 1 में वकीलों की खचाखच भीड़ हो गई थी।