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अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट : स्वामी असीमानंद बरी, 3 दोषी

अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट मामले में एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने बुधवार को फैसला ​सुना दिया। इस मामले में विशेष न्यायाधीश दिनेश गुप्ता ने आरोपी देवेंद्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को दोषी करार दिया है। इनमें सुनील जोशी की मौत हो चुकी है।

जबकि स्वामी असीमानन्द व अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अब आरोपी देवेंद्र व भावेश को सजा 16 मार्च को सुनाई जाएगी। इन दोनों पर 1—1 लाख रुपए का आर्थिक जुर्माना लगा दिया गया है।

अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में आहता— ए— नूर पेड़ के पास 11 अक्टूबर 2007 को बम विस्फोट हुआ था। इससे पहले अदालत 25 फरवरी को इस मामले में फैसला सुनाने वाली थी।

मगर, दस्तावेजों और बयानों को पढ़ने और फैसला लंबा होने के कारण लिखने में समय लगने की वजह से अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 8 मार्च की तारीख तय हुई थी।

11 अक्टूबर 2007 को दरगाह परिसर में हुए बम विस्फोट में तीन जायरीन मारे गए थे और पंद्रह जायरीन घायल हो गए थे। विस्फोट के बाद पुलिस को तलाशी के दौरान एक लावारिस बैग मिला था। जिसमे टाइमर डिवाइस लगा जिंदा बम रखा था।

एनआईए ने तेरह आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। इनमें से आठ आरोपी साल 2010 से न्यायिक हिरासत में बंद हैं। न्यायिक हिरासत में बंद आठ आरोपी स्वामी असीमानंद,हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, भावेश पटेल, मेहुल कुमार,भरत भाई, देवेन्द्र गुप्ता हैं। एक आरोपी चन्द्र शेखर लेवे जमानत पर है।

मामले में एक आरोपी सुनील जोशी की हत्या हो चुकी है और तीन आरोपी संदीप डांगे, रामजी कलसांगरा और सुरेश नायर फरार चल रहा है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए, लेकिन अदालत में गवाही के दौरान कई गवाह अपने बयान से मुकर गए।

राज्य सरकार ने मई 2010 में मामले की जांच राजस्थान पुलिस की एटीएस शाखा को सौंपी थी। बाद में एक अप्रैल 2011 को भारत सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौप दी थी।

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