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मौत के 20 साल बाद अस्पताल और डॉक्टर दोषी

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मुंबई – महाराष्ट्र में इलाज के दौरान हुई एक महिला की मौत के 20 साल बाद अस्पताल और डॉक्टर की गलती ठहराई गई है । इस प्रेगनेंट महिला की खून की कमी के कारण मौत हो गई थी। अब स्टेट कन्जयूमर कमिशन ने इस मामले में नालासोपारा के एक अस्पताल को इस मामले में दोषी पाया गया है।

मृतक महिला के परिवार वालों को मुआवजे के तौर पर 16 लाख रुपये मिलेंगे। बोरिवली निवासी परिवार को अस्पताल और संबंधित डॉक्टर मिलकर मुआवजे की राशि देंगे। स्टेट कन्जयूमर कमिशन की बेंच के पीबी जोशी और नरेंद्र कावडे ने टाटे अस्पताल और डॉक्टर राजेश टाटे को अपने काम में कोताही बरतने का आरोपी पाया।

34 मृतक महिला मयूरी ब्रह्मभट्ट को दूसरे बच्चे की डिलीवरी के लिए परिजनों ने 20 सितंबर 1995 को टाटे अस्पताल में भर्ती कराया था। उनका ब्लड ग्रुप ए नेगेटिव था, जो कि काफी मुश्किल से मिलता है। अस्पताल में उनके ऑपरेशन से पहले खून का इंतजाम नहीं किया गया। कमिशन ने उन्हें इसी बात का दोषी माना है।

अपने फैसले में कमिशन ने अस्पताल और डॉक्टर को जान जाने के लिए 5 लाख रुपये, पति का साथ छूटने के लिए 2 लाख रुपये, दोनों बेटियों को मां का प्यार न मिलने पर 3-3 लाख रुपये, बेटियों की देखभाल और खाना बनाने के लिए एक महिला की सेवाएं लेने पर 2 लाख रुपये, घरेलू नौकर रखने के लिए 1 लाख रुपये और कानूनी लड़ाई के खर्च के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा देने को कहा है।

महिला को 20 सितंबर 1995 को सुबह 5.30 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और सुबह 9.30 पर उन्हें बेटी हुई। इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़नी शुरू हई। महिला से मिलने आए उनके एक परिचित डॉक्टर ने टाटे अस्पताल के डॉक्टरों से महिला को भगवती अस्पताल में रेफर करने को कहा।

परिजनों और दोस्तों ने खून की 18 बोतलों का इंतजाम कर भगवती अस्पताल में उनके इलाज की तैयारी भी कर ली थी, लेकिन टाटे अस्पताल ने दोपहर तीन बजे से पहले महिला को रेफर करने से मना कर दिया। शाम 4.30 बजे भगवती अस्पताल पहुंचने तक महिला की मौत हो गई थी। – एजेंसी

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