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ताजमहल मंदिर नहीं है मकबरा है ये है सबूत !

आगरा: ताज महल मकबरा है या मंदिर इसे लेकर चल रहा विवाद केंद्र व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करने के बाद और उलझता नजर आ रहा है। अपर सिविल जज थर्ड सीनियर डिवीजन की अदालत में दाखिल प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि राजा जय सिंह की संपत्ति को हड़पा नहीं गया था, बल्कि संपत्ति की अदला-बदला की गई थी। इस पर आपत्ति के लिए वादी अधिवक्ता ने समय मांगा है।

लखनऊ के हरीशंकर जैन व अन्य की ओर से अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने वर्ष 2015 में सिविल कोर्ट में ताजमहल को लॉर्ड श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजोमहालय मंदिर घोषित करने को याचिका दायर की थी।

इसमें गुरुवार को केंद्र व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने प्रतिवाद पत्र दाखिल किया था। इसमें वर्ष 1195 ईस्वी (विक्रम संवत 1252) के बटेश्वर शिलालेख के अनुसार, ताजमहल में कोई मंदिर या शिवलिंग होने व उसे तेजोमहालय मानने से इंकार किया है।

राजा जय सिंह की संपत्ति शाहजहां द्वारा लेने के सच को स्वीकार करते हुए कहा गया है कि संपत्ति हड़पी नहीं थी। इसके बदले में जय सिंह को भी संपत्ति दी गई थी। प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड व सूचनाओं के अनुसार, ताजमहल शाहजहां ने अर्जुमंद बानो बेगम की याद में बनवाया था।

वादी अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने बताया कि प्रतिवाद पत्र में माना गया है यह राजा जयसिंह की संपत्ति थी। हमारा भी यही कहना है कि यह मंदिर था और राजा जयसिंह से शाहजहां ने छीना था। इसमें आज भी भगवान शिव विराजमान हैं।

जयपुर में है मान सिंह का फरमान

ताज के राजा मान सिंह से जुड़ा होने का अभिलेख जयपुर स्थित सिटी पैलेस संग्रहालय में है। इसमें जिक्र है कि राजा मान सिंह की हवेली के बदले में शाहजहां ने उनको चार हवेलियां दी थीं। यह फरमान 16 दिसंबर, 1633 का है। इसमें राजा भगवान दास की हवेली, राजा माधा सिंह की हवेली, रूपसी बैरागी की हवेली और चांद सिंह पुत्र सूरज सिंह की हवेलियां देने का उल्लेख है।

1888 में मिला था बटेश्वर शिलालेख

सन् 1888 में बटेश्वर में मिले शिलालेख में राजा परमार्दिदेव के मंत्री सलक्षणा द्वारा भव्य वैष्णव व शैव मंदिर बनवाने का जिक्र है। लखनऊ संग्रहालय में रखे वर्ष 1195 के इस शिलालेख में दो फुट चौड़ाई व एक फुट आठ इंच ऊंचाई में नागरी लिपि में संस्कृत भाषा के 24 श्लोक हैं। शिलालेख मंदिरों की जगह के बारे में कुछ नहीं कहता। मगर, प्रो. पीएन ओक ने इसमें उल्लिखित शिव मंदिर को ताजमहल बताया था।

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