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डॉ. जिसे बताया था आतंकी , वह बचा रहा है जानें

farsi-sabhar-indianexpressनासिक – 31 दिसंबर की शाम जब लोग पार्टी कर रहे थे, तब डॉ. सलमान फारसी एक बम ब्लास्ट में घायल लोगों का इलाज कर रहे थे। तेजी से भागती ऐंबुलेंस में वह मरीजों का ब्लड प्रेशर ट्रैक करने की कोशिश कर रहे थे, खून के बहाव को रोकने की कोशिश कर रहे थे। एबुलेंस बम ब्लास्ट में घायल लोगों को लेकर मालेगांव के सिविल हॉस्पिटल की ओर जा रही थी।

एबुंलेंस में 2 घायल थे- एक गड़रिया और किसान। उन्होंने मालेगांव के रजवाड़े गांव में पेड़ की डाल से लटकते एक प्लास्टिक बैग को जैसे ही छुआ ब्लास्ट हो गया। बाद में पता चला कि प्लास्टिक में एक देसी बम था। पुलिस की जांच से पता चला कि इस बम का इस्तेमाल ‘पारधी’ जनजाति के लोग जंगली जानवरों को मारने के लिए करते हैं।

डॉ. फारसी जो कर रहे थे वह शायद कोई दूसरा डॉक्टर भी करता। डॉ. फारसी के बारे में बात करना इसलिए अहम है क्योंकि उन पर आतंकी बम ब्लास्ट की साजिश का आरोप लगा था और 3 साल पहले तक वह जेल में थे। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनको 8 सितंबर, 2006 में मालेगांव के मुशवरत चौक पर स्थित हमिदिया मस्जिद के पास हुए बम ब्लास्ट के सिलसिले में जेल भेजा गया था।

मालेगांव बम ब्लास्ट के आरोप में 9 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया था। डॉ. फारसी भी इनमें से एक थे। उन्होंने महाराष्ट्र की जेलों में 5 साल काटे। बाद में एनआईए की जांच में पता चला कि ब्लास्ट दरअसल एक हिंदू चरमपंथी संगठन ने करवाया था। एनआईए के खुलासे के बाद डॉ. फारसी को जमानत पर रिहा कर दिया गया। मालेगांव ब्लास्ट के बारे में दो एजेसिंयों ने अलग-अलग आरोपी तय किए हैं। ऐसे में कोर्ट द्वारा डॉ. फारसी और बाकी 8 आरोपियों के बारे में आखिरी फैसला दिया जाना अभी बाकी है। फिलहाल डॉ. फारसी जेल से बाहर हैं। मरीजों का इलाज और देखभाल करने के साथ ही वह तय तारीखों पर पेशी के लिए कोर्ट भी जाते हैं।

बुधवार शाम डॉ. फारसी के लिए अचानक ही इमर्जेंसी कॉल आई और वे बम ब्लास्ट में घायल लोगों की मदद के लिए दौड़ पड़े। डॉ. फारसी से जब पूछा गया कि ब्लास्ट का आरोपी बनाए जाने पर वह कैसा महसूस करते हैं, जबकि वह खुद ब्लास्ट में घायल लोगों का इलाज कर रहे हैं, उन्होंने कहा, “इस सवाल का जवाब दे पाना मेरे लिए बहुत मुश्किल है।”

ब्लास्ट में घायल गड़रिए और किसान को पहले प्राथमिक उपचार केंद्र ले जाया गया। वहां के डॉक्टर ने तुरंत ऐंबुलेंस मंगवाया। एबुलेंस डॉ. फारसी को लेकर प्राथमिक उपचार केंद्र पहुंची। उन्होंने 2 महीने पहले ही भारत विकास ग्रुप में इमर्जेंसी डॉक्टर के तौर पर जॉइन किया था।

बुधवार शाम जब उन्हें इमर्जेंसी कॉल आई, वह हमेशा की तरह मेडिकल सायंस की एक किताब पढ़ रहे थे। कॉल आते ही वह ऐंबुलेंस लेकर घायलों के इलाज के लिए निकल गए। डॉ. फारसी ने बताया,”दोनों घायल बुधवार की दोपहर अपनी भेड़-बकरियां चरा रहे थे और तभी उनकी निगाह पेड़ पर लटके प्लास्टिक बैग से पड़ी। दोनों ने अपने डंडे से उसे हाटाने की कोशिश की और ब्लास्ट हो गया।”

डॉ. फारसी के मुताबिक, दोनों के चेहरे, गर्दन, हाथ, पैर और जांघें जख्मी हो गई हैं। दोनों के मालेगांव सिविल हॉस्पिटल पहुंचने तक डॉ. फारसी ने उनकी निगरानी की। उन्होंने बताया,”मैंने उनके ब्लड प्रेशर,टेंपरेचर और नाड़ी की जांच की। दोनों की हालत स्थिर है।”

जेल से बाहर आने के बाद डॉ. फारसी को जॉब मिलना मुश्किल हो गया था। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने मस्जिद में नमाजें आयोजित कीं, यहां तक कि भेड़ें भी चराईं। डॉ. फारसी ने बताया,”जेल से बाहर आने के बाद मुझे डॉक्टर के तौर पर काम मिलने में लंबा वक्त लग गया।”

इसी बीच पुलिस ने दिनेश पावर नाम के एक शख्स को ब्लास्ट के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। उस पर लोगों की जिंदगी और सुरक्षा खतरे में डालने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने बताया कि दिनेश ने जंगली सूअर का शिकार करने के लिए देसी बम को प्लास्टिक बैग में रखकर पेड़ पर लटकाया था। -TNN

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