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ये दिक्कत नहीं होती तो देते मुंह तोड़ जवाब:वीके सिंह

vk_singhनई दिल्ली – केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने आज कहा कि मुंबई हमले जैसी आतंकी कार्रवाइयों का बदला लेने के लिए भारतीय सेना चुनौतीपूर्ण अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है, लेकिन कुछ विचार उसे ऐसा करने से राकते हैं। दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने भी वीके सिंह का समर्थन करते हुए कहा कि सीबीआई में उनके रहने के दौरान एजेंसी ने पाकिस्तान में एक सज्जन को पकड़ने की योजना तैयार की थी, लेकिन आखिरी दिन राजनीतिक आकाओं ने इसे विफल कर दिया।

वीके सिंह ने एक किताब के विमोचन के मौके पर कहा, ‘भारतीय सेना बहुत सक्षम है। लक्ष्य दिए जाने पर वह उससे बेहतर ढंग से अंजाम दे सकती है जैसे अमेरिकियों ने (ओसामा बिन लादेन वाले अभियान) किया था। मेरा मानना है कि एक देश के रूप में हमने अपनी सहिष्णुता की सीमाओं को बहुत अधिक लचीलापन दिया है। कहीं न कहीं मुझे लगता है कि कई ऐसे कारक हैं, जिन्हें 99 फीसदी लोग नहीं समझ पाते कि ऐसा क्यों हैं?’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस्राइल जैसे देश ही नतीजों की परवाह नहीं करते हुए कुछ चीजें कर सकते हैं। पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, ‘भारत उस स्थिति में नहीं है। हमें कई चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। खासकर अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का।’

ये दोनों एस हुसैन जैदी की पुस्तक ‘मुंबई एवेंजर्स’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। नीरज कुमर ने भारत को सॉफ्ट स्टेट करार देते हुए कहा कि जब बदला लेने की बारी आती है तब भी हम सॉफ्ट ही रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘जब मैं नौ सालों के लिए सीबीआई में था, उस दौरान एक बार हमने पाकिस्तानी शख्स को दबोचने की सारी तैयारी कर ली थी। लेकिन, अंतिम समय में राजनीतिक नेतृत्व ने कहा कि हम पाकिस्तान नहीं, भारत हैं।’

नीरज कुमार ने कहा कि एजेंसी ने इसके लिए ‘बाहरी तत्वों’ को काम पर लगाया था और काफी निवेश भी कर चुकी थी, लेकिन सारी तैयारी बेकार चली गई। राजनीतिक इच्छाशक्ति के महत्व पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि संसद पर हमले के बाद भारत पाकिस्तान पर हमला कर सकता था लेकिन राजनीतिक नेतृत्व ने देरी कर दी।’

उन्होंने कहा, ‘भारत ने कहा कि संसद पर हमला मंजूर नहीं है। भारत ने अपनी सेना भी तैनात कर दी और इसके बाद ‘बिग ब्रदर’ ने मॉनीटरिंग शुरू कर दी। शायद हमें सीधे युद्ध छेड़ देना चाहिए था। जो लोग युद्ध नहीं चाहते थे उनके ‘संदेशों’ ने प्रक्रिया को धीमा कर दिया और फिर वह क्षण भी आया जब हमें तत्कालीन पाकिस्तानी पीएम मुशर्रफ के बोलने तक इंतजार करने के लिए कहा गया। इसके बाद 12 जनवरी को उन्होंने बयान दिया कि वह अपनी बातों का पालन करेंगे। तब तक काफी देर हो चुकी थी।’

जनरल सिंह ने कहा, ‘हो सकता है कि आपके पास इच्छाशक्ति भी हो, लेकिन जब आप दूसरी चीजों को तौलने लगते हैं तो इसमें दूरदर्शिता नहीं दिखाई देती है।’ 26/11 के हमले के बारे में उन्होंने संकेत दिया कि इसकी वजह इंटेलिजेंस की विफलता थी।

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