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गन्दा करने वालों को वंदे मातरम कहने का हक नहीं- PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज स्वामी विवेकानंद के शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिए भाषण के 125 साल पूरे होने और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती के मौके पर देश के युवाओं को संबोधित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम की थीम ‘यंग इंडिया न्यू इंडिया ए रिसर्जेंट नेशन:संकल्प से सिद्धि तक’ है। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने दुनिया को नया रास्ता बताया। सवा सौ साल पहले भी 9/11 हुआ था। लोगों को आज की तारीख का महत्व नहीं पता।

एक महापुरुष ने मुझसे कहा था कि हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम पुरानी उपलब्धियों में ही अटके हुए हैं। 1000 साल पहले ऐसा हुआ था। 2000 साल पहले यूं हुआ। बुद्ध ने ये कहा था। राम ने यह कहा था। लेकिन जरूरत यह है कि आज हमने क्या किया।

हिंदुस्तान के प्रति विश्व के देखने का नजरिया बदल चुका है। यह सवा सौ करोड़ देशवासियों की वजह से है। हमें बुराइयों से लड़ने की जरूरत है। बुराइयों को दरी के नीचे ढांकने से केवल गंध और सड़ांध ही होगी।

क्रिएटिविटी के बिना जिंदगी नहीं है। हम रोबोट नहीं बन सकते। हम कुछ ऐसा करें जिससे देश की ताकत बढ़ें।

कॉलेजों में अलग—अलग डे मनाए जाते हैं। जैसे रोज डे, कुछ लोग इसका विरोध भी करते हैं। ऐसे कुछ लोग यहां भी बैठे हैं लेकिन मैं इसका विरोधी नहीं हूं। हमें रोबोट नहीं चाहिए क्रि​एटिव लोग चाहिए, इंसान चाहिए, लेकिन इसके साथ ही हरियाणा के किसी कॉलेज में तमिल डे मनाया जाए। ऐसे ही हर राज्य में दूसरे राज्य का डे मनाया जाए। इससे विविधता में एकता की बात और सार्थक होगी।

स्वामी विवेकानंद ने 120 साल पहले कहा था, ‘वन एशिया’ आज दुनिया उसी बात को कह रही है। पूरी दुनिया कह रही है कि 21वीं सदी एशिया की सदी है।

भारत का मार्केट बहुत बड़ा है, वह देश के युवाओं की इनोवेशन, प्रॉडक्ट का इंतजार कर रहा है।

दुनिया में क्या कोई ऐसा व्यक्ति देखा है जो फेल ना हुआ हो। फेल होने से घबराना जिंदगी नहीं है।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि हम दिमाग में इतना ज्ञान डाल देते हैं कि वह जिंदगी भर बिना किसी काम के पड़ा रहता है। इसके बजाय अगर पांच आइडिया भी आपके पास हैं तो वह पुस्तकालय के पूरे ज्ञान से भी ज्यादा कारगर है। आज भी यही जरूरत है। हाथ के हुनर की ज्यादा जरूरत है।

आज जब मैं मेक इन इंडिया की बात करता हूं तो लोग मजाक उड़ाते हैं। कुछ बुद्धिमान कहते हैं ऐसा नहीं मेड इन इंडिया होना चाहिए। लेकिन स्वामी विवेकानंद ने भी भारत में उद्योग लगाने की बात जमशेदजी टाटा से कही थी। बाद में जमशेदजी ने इस बात को माना भी था कि विवेकानंद की बात से ही उन्हें उद्योग लगाने की प्रेरणा मिली।

सपेरों का देश, पूर्णिमा अमावस्या पर क्या खाना है यही हमारी पहचान थी, लेकिन स्वामी विवेकानंद ने इस पहचान को बदला। उन्होंने कहा मेरे भारत की यह पहचान नहीं है।

एक बार मैंने पहले शौचालय फिर देवालय कहा तो लोगों ने मेरे बाल नोंच लिए. लेकिन आज गर्व है कि हमारी बेटियां आज पहले शौचालय फिर शादी की बात करती हैं।

भारत की सफाई करने वालों को वंदे मातरम कहने का हक है।

हम सारा कचरा भारत मां पर डालें और फिर वंदे मातरम बोलें, अगर किसी को वंदे मातरम बोलने का हक है तो सबसे पहले सफाई का काम करने वाले का है।

क्या हमें वंदे मातरम कहने का हक है क्या। 50 बार सोच लीजिए, हम लोग पान खाकर भारत मां पर पिचकारी मारे और वंदे मातरम बोलें।

अगर हम लडकियों में समानता नहीं देखते हैं, उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं देते हैं तो फिर हमें स्वामी विवेकानंद के भाषण पर तालियां बजाने पर 50 बार सोचना चाहिए।

जब देश में रीति रिवाजों का दौर था उस समय भी विवेकानंद ने कहा कि मंदिर में जाकर भगवान का गुणगान करने, पूजा करने से कुछ नहीं होगा। जनसेवा करने से भगवान मिलेंगे।

वे दुनिया में जाकर भारत का गुणगान करते थे लेकिन जब यहां आते थे तो यहां की बुराइयों पर कठोरता से वार करते थे।

विवेकानंद ने दुनिया का भारतीय संस्कृति से परिचय कराया था। कुछ शब्दों के जरिए भारत के एक नौजवान ने दुनिया को जीत लिया और दुनिया को एकता की ताकत बताई।

आज 9/11 है, यह​ दिन 2001 के बाद जाना जाने लगा लेकिन 1893 में भी 9/11 हुआ था जिसे हम याद करते हैं।

 

इस कार्यक्रम को लेकर भी विवाद हो गया है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने सभी विश्वविद्यालयों में पीएम मोदी के भाषण का LIVE प्रसारण करने का आदेश जारी किया है। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर ऐतराज जताया है।

बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्था चटर्जी ने कहा कि यह शिक्षा के भगवाकरण का प्रयास है। वे बिना सलाह मशविरा किए फैसले ले रहे हैं। केंद्र सरकार बिना राज्य से सलाह किए इस तरह के फैसले नहीं ले सकती। राज्य सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को यूजीसी के आदेश को नजरअंदाज करने को कहा है।

बंगाल के संस्थानों ने कहा कि उन्हें यूजीसी से किसी प्रकार का आदेश नहीं मिला है। जाधवपुर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सुरंजन दास ने कहा कि उन्हें इस तरह का कोई खत नहीं मिला है। उन्होंने बताया, ‘ मुझे यूजीसी से इस तरह के किसी सर्कुलर की जानकारी नहीं है। आजकल यूजीसी अपनी वेबसाइट पर सर्कुलर अपलोड करती है। पत्र आने दीजिए फिर फैसला करेंगे। सामान्यतया इस तरह के मामलों में हम राज्य सरकार से मशविरा करते हैं और फिर आखिरी फैसला लेते हैं।

बता दें कि इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने 15 अगस्त के मौके पर देशभक्ति से जुडे कार्यक्रम आयोजित करने के मानव संसाधन मंत्रालय के आदेश को भी मानने से इनकार कर दिया था।

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