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हिन्दु मुस्लिम एकता की मिसाल थे आबिद अली आज़मी

 लखनऊ- भारतीय अवाम सोसाइटी के संस्थापक व ‘आओ जाने होली क्या है’ और ‘राष्ट्र रक्षा बंधन’ जैसे कार्यक्रम के जनक आबिद अली आज़मी की याद में आज प्रेस क्लब, लखनऊ में एक श्रद्धांजलि सभा का अयोजन किया गया है। जिसमें भारी तादाद में उनके चाहने वालों ने हिस्सा लिया । लोगों की आबिद अली के लिए कितनी मोहब्बत थी वह इससे पता लगता है कि 11 बजे के कार्यक्रम में लोग 10 बजे से ही आने लगे थे और पूरे वक्त तक सभा में शरीक रहे।

जैसा कि बताते चले आबिद अली आजमी की मृत्यु 15 अप्रैल को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हुई थी । आबिद अली 7 अप्रैल को अपने घर पर चाय बनाते समय हल्का झुलस गये थे जिसके बाद उनको लखनऊ के सिप्स अस्पताल में भर्ती किया गया था । उनके घर वालों के अनुसार सिप्स अस्पताल के डाक्टरों की लापरवाही के कारण उनको इन्फेक्शन हो गया और हालत ज्यादा खराब होने के कारण सिप्स अस्पताल वालों ने उनको दिल्ली सफदरजंग हास्पिटल रेफर कर दिया जहाॅं पर उनकी मौत हो गयी ।

श्रद्धांजलि सभा में बोलते हुए संसथा के संरक्षक कांग्रेस नेता मारुफ खान ने आबिद अली के बारे में बताते हुए कहा कि वह लखनऊ की गंगा जमुनी तहजीब और हिन्दु मुस्लिम एकता के सही वाहक थे । उन्होंने अपनी सारी जिन्दगी आम जनता के लिए लगा दी थी । वह भारत में अपनी तरह के ऐसे कार्यक्रम कराते थे जिनकी पूरे भारत में कही मिसाल नहीं मिलती है । पहला आओ जाने होली क्या है इस प्रोग्राम के अन्र्तगत वह होली से कुछ दिन पहले अपनी गरीब हिन्दु भाईयों को खुशी में शामिल करने के लिए एक सर्वे के उपरान्त कम से कम 100 लोगों केा खाद्य सामग्री बाटा करते थे जिससे वह गरीब परिवार भी होली की खुशी में शामिल हो सके जिनकी स्थिति अच्छी नहीं है । दूसरा कार्यक्रम राष्ट्र रक्षा बंधन था जो विगत 25 वर्षो से आयोजित कर रहे थे जिसमें उनका कहना था कि रक्षा बंधन के दिन बहने अपने भाई के कलाई पर दो धागे बंधे एक अपनी रक्षा के लिए दूसरा राष्ट्र की रक्षा के लिए। इस प्रकार की सोच के मालिक थे आबिद अली आज़मी जिनको सच्चा राष्ट्र और समाज सेवी कह सकते है ।

आबिद अली आज़मी की श्रद्धांजलि सभा में आज असली भारत देखने को मिल रहा था जहाॅं मौलाना फजर्लुरहमान वाइजी थे तो दिव्यागिरि भी थी । सभा में बोलते हुए कांग्रेसी नेता व कैन्ट विधायक रीता बहुगुणा जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होने ऐसा मोहब्बत करने वाला इंसान नहीं देखा वह हर किसी की मदद के लिए सबसे पहले खड़े हो जाते थे।

दिव्यागिरि ने आबिद अली के विषय में बोलते हुए कहा कि वह इतने नेक इंसान थे कि मेरे पास कभी भी मिलने आते थे और मैं वहाॅं पर नहीं होती थी तो काफी देर तक मेरा इंतजार कर लेते थे ऐसे इंसान आज बहुत कम है और आबिद अली की कमी हमेशा हम लोगों को रहेगी ।

बनारस से आये साहित्यकार सलमान बशर ने एक शेर की मदद से अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि
‘‘गुजर तो जायेगी तेरे बगैर भी लेकिन
बहुत उदास बड़ी बेकरार गुजरेगी ।

कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए अपनी श्रद्वांजलि आबिद अली को दी जिसमें मुख्य रुप से बी0डी0नकवी , डा0 रुप रेखा वर्मा , प्रोफेसर साबिरा हबीब, प्रोफेसर रमेश दीक्षित, खान मोहम्मद आतिफ ,डा0 रईस , नदीम खान , तारिक सिद्वीकी, अनीस अंसारी , तालिब अली तथा भारी तादाद में लोगों ने शिरकत की सभा का संचालन कुद्दूस हाशमी ने किया
स्व0 आबिद अली की मृत्यु में सिप्स अस्पताल के डाक्टरों द्वारा बर्ती गयी घोर लापरवाही के लिए श्रद्वांजलि सभा में एक प्रस्ताव भी पास किया गया जिसमें कहा गया है कि जल्द ही एक प्रतिनिधि मंडल मौलाना फजुर्लरहमान के नेतृत्तव में मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेगा और सिप्स अस्पताल के खिलाफ जांच कराकर सख्त कार्यवाही की मांग करेंगा ।

@शाश्वत तिवारी

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