Home > Business News > विज्ञापनों में झूठे दावों पर 2 साल जेल, 10 लाख जुर्माना तय

विज्ञापनों में झूठे दावों पर 2 साल जेल, 10 लाख जुर्माना तय

उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कड़े प्रावघानों वाले उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2018 में गलत या भ्रामक विज्ञापन देने पर दो साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने आज लोकसभा यह विधेयक पेश किया। इससे पहले उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2015 वापस ले लिया। नये विधेयक में प्रावधान किया गया है कि कोई विनिर्माता या सेवा प्रदाता गलत या भ्रामक विज्ञापन देता है जो उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है तो उसे दो साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

यदि किसी के खिलाफ ऐसे एक से ज्यादा मामले हों तो हर अगले मामले के लिए पाँच साल तक की कैद और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के आदेशों को नहीं मानने वालों को छह महीने तक की कैद या 20 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है। विधेयक में नकली उत्पादों के विनिर्माताओं, भंडारकों, विक्रेताओं और वितरकों या मिलावटी सामान आयात करने वालों के लिए चार तरह के प्रावधान हैं।

किसी उत्पाद से उपभोक्ता के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुँचता है तो छह महीने की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इससे उपभोक्ता के स्वास्थ्य को मामूली नुकसान पहुँचता है तो उस स्थिति में एक साल तक की कैद और तीन लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

ऐसे उत्पादों से उपभोक्ता के स्वास्थ्य को ज्यादा जोखिम के मामले में सात साल तक की कैद और पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना तथा मृत्यु की स्थिति में सात साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रवधान है।

इस दोनों स्थितियों में अपराध संज्ञेय एवं गैर-जमानती श्रेणी में आयेगा। पहली बार दोषी पाये जाने पर उत्पाद विनिर्माता या आपूर्तिकर्ता का लाइसेंस दो साल तक के लिए निलंबित किया जा सकता है जबकि दूसरी बार में लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है।

Facebook Comments

Our News Network and website neither have any collaboration and connection directly nor indirectly with “India Today Group/ITG” ,TV Today Network, Channel Tez TV media group .