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बजट 2017 से हैं हाउस वाइफ, स्टूडेंट सहित इनको यह उम्मीदें

Budget 2016नई दिल्ली- बजट 2017 से देश के अलग-अलग वर्ग को तमाम उम्मीदें हैं। आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और बचत या निवेश के विकल्पों के बीच करोड़ों टैक्स पेयर्स और सैलरी क्लास वित्त मंत्री से उम्मीदें लगाए बैठा है। टैक्सफर्म e-Munshe के फाउंडर और चार्टेड अकाउंटेंट अंकित गुप्ता से बातचीत कर हम अपनी इस खबर में अलग अलग वर्ग की उम्मीदों को बता रहे हैं।

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युवा कर्मचारियों की उम्मीदें:
• इनकम टैक्स स्लैब में करमुक्त आय की सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये की जाने की उम्मीद।

• सेक्शन 80 टीटीए के तहत सेविंग बैंक पर ब्याज कटौती की सीमा को 10 हजार से बढ़ाकर 25 हजार की जाए। साथ ही टर्म डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज भी इस कटौती के दायरे में आना चाहिए।

आम बजट से है इस राहत की उम्मीद

• हाउसिंग लोन पर अदा किए जाने वाले ब्याज भुगतान की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी जाए।

• मौजूदा समय में लीव ट्रैवल एसिस्टैंट (एलटीए) चार कैलेंडर इयर्स में दो बार की लिया जा सकता है। टैक्स राहत देते हुए इसे वर्ष में एक बार कर देना चाहिए साथ ही इसमें विदेश की सैर भी शामिल हो।

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सैलरी क्लास की बजट से उम्मीदें:
• इनकम टैक्स स्लैब रेट 2.5 लाख से चार लाख तक बढ़ाया जाए।

• सेक्शन 80 सी के तहत मिलने वाली बेसिक डिडक्शन (मूल कटौती) को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया जाए।

• आयकर के सेक्शन 80डी के तहत प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना को शामिल किया जाना चाहिए ताकि पॉलिसी के तहत प्रीमियम के भुगतान पर इनकम टैक्स बैनिफिट मिल सके।

• सेक्शन 80 टीटीए के तहत सेविंग बैंक एकाउंट पर मिलने वाला ब्याज 10 हजार से 25 हजार रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए।

• हाउसिंग लोन पर अदा किया जाने वाला ब्याज भुगतान सेक्शन 24बी के तहत टैक्स कटौती योग्य होता है। इसकी सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी जानी चाहिए।

• मेडिकल हेल्थ चेकअप के मद में किए गए भुगतान इस धारा के अंतर्गत (सेक्शन 80 डी के अलावा) आयकर में कटौती के योग्य होते हैं, हालांकि इसकी सीमा अधिकतम 10,000 रुपये सालाना तक ही होनी चाहिए।

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सैलरी क्लास कर्मचारी की क्या है इस बजट से उम्मीदें:
• इनकम टैक्स स्लैब रेट 2.5 लाख से चार लाख तक बढ़ाया जाए।
• सेक्शन 80 सी के तहत मिलने वाली बेसिक डिडक्शन (मूल कटौती) को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया जाए।
• आयकर के सेक्शन 80डी के तहत प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना को शामिल किया जाना चाहिए ताकि पॉलिसी के तहत प्रीमियम के भुगतान पर इनकम टैक्स बैनिफिट मिल सके।
• सेक्शन 80 टीटीए के तहत सेविंग बैंक एकाउंट पर मिलने वाला ब्याज 10 हजार से 25 हजार रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए।
• हाउसिंग लोन पर अदा किया जाने वाला ब्याज भुगतान सेक्शन 24बी के तहत टैक्स कटौती योग्य होता है। इसकी सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी जानी चाहिए।
• मेडिकल हेल्थ चेकअप के मद में किए गए भुगतान इस धारा के अंतर्गत (सेक्शन 80 डी के अलावा) आयकर में कटौती के योग्य होते हैं, हालांकि इसकी सीमा अधिकतम 10,000 रुपये सालाना तक होनी चाहिए।

छोटे व्यापारियों की उम्मीदें:
• इनकम टैक्स स्लैब 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर चार लाख रुपये तक कर दी जाए।
• सेक्शन 80 सी के तहत मिलने वाली बेसिक डिडक्शन (मूल कटौती जैसे कि पीपीएफ, ट्यूशन फी आदि) को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी जाए।
• कई और निवेश विकल्पों की घोषणा की जानी चाहिए जो इनकम टैक्स एक्ट के तहत क्लेम की जाने वाली कटौती (जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड) के अंतर्गत आती हैं।
• सभी वस्तुओं पर एक्साइज ड्यूटी के रेट घटा दी जाए।
• सभी लेन देन पर टैक्सेशन की संभावित दरों को 8 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी जाए।
• इनकम टैक्स के फॉर्म को सरल बनाया जाए।
• करंट एकाउंट खोलने के केवाइसी नियमों को सरल बानाया जाए।
• इनेक्ट्रॉनिक मोड (जैसे पेमेंट वॉलेट) के जरिए किये जाने वाले भुगतान पर इन्सेंटिव्स देने चाहिए। इससे डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहन मिलेगा।
• डेबिट और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए जाने वाले भुगतना पर टीडीआर (टिकट डिपॉजिट रिसिप्ट) शुल्क को माफ कर दिया जाए।
• एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए और स्कीम्स पेश की जानी चाहिए।

आन्त्रप्रेन्योर की उम्मीदें:
• कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दी जाए।
• एमएटी (मैट) की दर 18.5 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दी जाए।
• कंपनियों सहित बॉडी कॉरपोरेट्स के लिए भी निवेश विकल्प मुहैया कराए जाएं।
• कॉरपोरेट कम्प्लाइअन्स घटा देनी चाहिए।

वरिष्ठ नागरिकों की उम्मीदें:
• वरिष्ठ नागरिकों के लिए मूल कटौती सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर देनी चाहिए। मौजूदा समय में सेक्शन 80 टीटीए के तहत सेविंग बैंक इटरेस्ट 10 हजार रुपये तक मान्य है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए इसी लिमिट को 75000 रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही इसके कटौती के दायरे का विस्तार करते हुए इसमें टर्म इंटरस्ट और अन्य फिक्स्ड सेविंग विकल्प शामिल किए जा सकते हैं।

• वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये तक की अलग से कटौती पेश की जा सकती है जिसमें रोजमर्रा के मेडिकल खर्चे जैसे कि कसंल्टेशन, मेडिकल टेस्ट और फिज्योथैरेपी शामिल होंगे। इनमें अस्पताल में भर्ती होनी की जरूरत नहीं पड़ती है। मौजूदा समय में केवल अति वरिष्ठ नागरिक (जिनकी आयु 80 वर्ष से ऊपर है), को सेक्शन 80 डी के तहत 30,000 रुपये तक मेडिकल खर्चों की कटौती मिलती है। यह उन्हें मिलती है जिनके पास मेडिकल इंश्योरेंस नहीं है।

स्टूडेंट्स की उम्मीदें:
• फुल टाइम और पार्ट टाइम एजुकेशनल कोर्सेज करने वाले विद्यार्थियों को न्यूनतम दरों पर लोन मुहैया कराया चाहिए।
• टॉपर स्टूडेंट्स को इंटरस्ट फ्री लोन उपलब्ध कराया जाए।
• सभी एजुकेशनल संस्थानों में 15 फीसदी की दर से लिया जाने वाला सर्विस टैक्स माफ कर देना चाहिए ताकि कॉलेज फीस घट सके।
• मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य कंप्यूटर एक्सेसरिज की कीमतों में कटौती होनी चाहिए। यह मैन्यूफैक्चरिंग पर एक्साइस ड्यूटी और इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से संभव हो सकता है।

हाउस वाइफ की उम्मीदें:
• ड्राई फ्रूट्स पर से लोकल वैट हटा देना चाहिए।
• टीवी, वॉशिंग मशीन और अन्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक आइट्म की मैन्यूफैक्चरिंग पर से एक्साईज ड्यूटी और इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को घटा देना चाहिए।
• महिलाओं के लिए अलग से इनकम टैक्स स्लैब बनाया जाए जो 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के ब्रैकेट के अंतर्गत आती हैं।

नौकरीपेशा महिलाओं की उम्मीदें:
• वर्ष 2011-12 तक पुरुष की तुलना में महिला टैक्सपेयर्स को बेसिक एग्जेंप्शन या टैक्स रिबेट के रूप में अतिरिक्त टैक्स लाभ मिलता था। इसे फिर से पेश किया जाना चाहिए।
• बेटियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उसके अभिभावकों की ओर से लिए गए लोन के ब्याज, जिसपर 8 साल की मौजूदा सीमा है को हटाया जाना चाहिए।
• न्यूकिलियर फैमली के बढ़ते चलन को देखते हुए (जहां माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं) उन्हें क्रैच सुविधा पर टैक्स में राहत दी जानी चाहिए ताकि बच्चे की देखभाल की जा सके।

प्रोफेशनल्स की उम्मीदें:
• सर्विस टैक्स की दर घटा देनी चाहिए।
• ऑडिट की जरूरत को बढ़ा कर एक करोड़ रुपये कर दिया जाना चाहिए। [एजेंसी]




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