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तीन तलाक पर केंद्र सरकार के बिल को कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को तीन तलाक के खिलाफ केंद्र सरकार के बिल को मंजूरी दे दी है। मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार संसद के सत्र के बीच हुई इस बैठक में मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से राहत देने वाले इस बिल को पास कर दिया गया। इसके बाद अब केंद्र सरकार इस बिल को बहस के लिए संसद के दोनों सदनों में अगले हफ्ते में पेश कर सकती है।

इस बिल को पहले से ही 8 राज्यों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। तीन तलाक जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने इस बिल में अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोलकर तलाक देने की कोशिश करने वाले पतियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव किया गया है। इसके अनुसार अगर कोई पति अपनी पत्नी को तीन तलाक देता है तो इसे 3 वर्ष तक के कारावास के अलावा महिला को उचित मुआवजा और बच्चों की कस्टडी देने का प्रावधान किया गया है।

बता दें कि सरकार इस सत्र में ही इस बिल को लाने की तैयारी में थी और इसका जिक्र पीएम मोदी ने गुजरात में अपनी रैलियों के दौरान भी किया था। सरकार ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ नाम से इस विधेयक को लाएगी।

केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को तीन तलाक बिल को मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने हालही में तीन तलाक के मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे खत्म कर दिया था। पांच जजों की बेंच में से तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया था। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीन तलाक से संबंधित कानून बनाने को कहा था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उम्मीद जताई थी कि केंद्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिंताओं का खयाल रखा जाएगा।

बता दें, सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने 3:2 के मत से सुनाए गए फैसले में तीन तलाक को कुरान के मूल तत्व के खिलाफ बताया। कोर्ट ने कहा थआ कि मुस्लिमों में तीन तलाक के जरिए दिए जाने वाले तलाक की प्रथा अमान्य, अवैध और असंवैधानिक है।

प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर जहां तीन तलाक की प्रथा पर छह माह के लिए रोक लगाकर सरकार को इस संबंध में नया कानून लेकर आने के लिए कहने के पक्ष में थे। वहीं जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आर एफ नरीमन और जस्टिस यू यू ललित ने इसे संविधान का उल्लंघन करार दिया था। इस पीठ में खेहर के अलावा, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल थे।

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