संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य की उम्मीद बढ़ी

Narendra Modiसंयुक्त राष्ट्र – संयुक्त राष्ट्र में सुधार के लिए लंबे समय से जोर दे रहे भारत को इस दिशा में बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त राष्ट्र महासभा सुरक्षा परिषद के विस्तार पर चर्चा के लिए राजी हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के करीब 200 सदस्य देश सोमवार को सुरक्षा परिषद में सुधार से संबंधित दस्तावेज के मसौदे पर अगले एक साल तक चर्चा करने के लिए राजी हो गए। सदस्य देशों ने यह फैसला सर्वसम्मति से लिया है।

संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह पहला मौका है, जब महासभा के सदस्य राष्ट्रों ने इस सुधार प्रस्ताव के लिए अपने लिखित सुझाव दिए हैं। हालांकि अमेरिका, चीन और रूस ने इस कवायद में शामिल न होकर भारत के प्रयास में अड़ंगा डालने की कोशिश की। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों से सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए सहयोग मांग चुके हैं। उनका कहना है कि इस साल संयुक्त राष्ट्र अपनी 70वीं वर्षगांठ मना रहा है और सुधार के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है। सुरक्षा परिषद इस वैश्विक संगठन में निर्णय लेने वाला शीर्ष अंग है। इसके पांच स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं।

[box type=”note” ] आगे क्या होगा

-महासभा द्वारा चर्चा के लिए स्वीकृत प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के अगले साल के एजेंडे पर बात की गई है।

-इसका विषय “सुरक्षा परिषद की सदस्यता में बढ़ोतरी या बराबरी का प्रतिनिधित्व” है।

-एक बार मसौदा तैयार हो जाने के बाद उसे महासभा में मतदान के लिए रखा जाएगा

-यहां उसे पास होने के लिए दो तिहाई वोट की जरूरत पड़ेगी।[/box]

चीन सुरक्षा परिषद के विस्तार का कड़ा विरोध करता रहा है। खबर है कि वह सुधार के ढांचे पर चर्चा के इस प्रस्ताव पर वोटिंग कराना चाहता था, लेकिन उसे दूसरों का साथ नहीं मिला। इसके बाद उसने वोटिंग पर जोर भी नहीं डाला। चीन अगर वोटिंग पर जोर डालता, तो भारत को दूसरे देशों को अपने पक्ष में करने के लिए मेहनत करनी पड़ सकती थी। अमेरिका और रूस ने भारत की सदस्यता का मौखिक रूप से जरूर समर्थन किया था, लेकिन इस पर कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया।