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लाखों का पैकेज छोड़कर धारी है दीक्षा :विशुद्धसागर

Sidhwarkut Mahotsav News

विशुद्धसागरजी के संघ में युवा मुनियों में सीए, एमबीए, एलएलबी डिग्रीधारी है मुनि
खण्डवा [ TNN ] सर्वतोभद्र सिद्धवरकूट महामहोत्सव 14-15 दिसम्बर में अपना सान्निध्य प्रदान कर रहे गणाचार्य विरागसागरजी महाराज के परम शिष्य आध्यात्म योगी, चर्या शिरोमणि श्रमणाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के संघस्थ मुनिराजों में अधिकांश मुनि मध्यप्रदेश के है। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश के उच्च शिक्षित युवाओं ने लाखों के पैकेज छोड़कर दिगम्बर बाना धारण किया है।

महामहोत्सव के प्रचार संयोजक राजेन्द्र जैन महावीर, सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि दिगम्बर होना तलवार की धार पर चलने के समान है। श्रमणाचार्य विशुद्धसागर जी जो म.प्र. के भिण्ड जिले के रुर ग्राम के निवासी है, मात्र 17 वर्ष की उम्र में घर छोड़ दिया था। 20 वर्ष की उम्र में दिगम्बर दीक्षा धारण की थी। अपनी प्रतिभा संपन्न तीक्ष्ण बुद्धि के कारण अपने गुरु के प्रिय बने और 16 वर्ष तक मुनि रहने के दौरान गहन अध्ययन किया। 2007 में उन्हें श्रमण अवस्था का आचार्य पद प्राप्त हुआ।

पचास से अधिक पुस्तकों का सृजन कर चुके विशुद्धसागर जी हिन्दी, संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रस, अंग्रेजी, मराठी भाषाओं के जानकार है। आपके सिद्धहस्तों से 19 युवा दिगम्बर दीक्षा व 4 क्षुल्लक दीक्षाएं संपन्न हुई है। संघस्थ मुनियों में सुप्रभसागरजी महाराष्ट्र के है वे सीए की डिग्री धारण कर अपना पैकेज छोड़ दिगम्बर हो गए। प्रत्यक्ष सागरजी बीई, बीए, एलएलबी डिग्रीधारी है।

प्रणेय सागरजी बीई, एमबीए है। अप्रमितसागर जी एमएससी (आईटी) है। आदित्यसागर जी एमबीए है। प्रणीतसागर जी एमकाम, एमबीए है। मनोज्ञसागरजी एमए, बीएड, आयुर्वेद रत्न है। आस्तिक्यसागर जी बी.फार्मा है। इसी तरह मुनिश्री विश्ववीर सागरजी, प्रमेयसागरजी, प्रषमसागरजी, सुव्रतसागरजी, सुयशसागरजी, अनुत्तरसागरजी, अनुपम सागरजी, अरिजितसागरजी, आराध्यसागरजी, प्रणुतसागरजी महाराज है जो बीए, एमए, एमएससी, स्नातक, स्नातकोत्तर डिग्री धारण किए हुए है। साथ ही अंग्रेजी, संस्कृत, प्राकृत, बंगाली, न्याय विद्या, कन्नड़ भाषा के जानकार व काव्य प्रतिभा व प्रवचनों के विशेषज्ञ है।

अपना सब कुछ छोड़ ये दिगम्बर संत चौबीस घण्टे में एक बार आहार-पानी ग्रहण करते है। दिगम्बर रहकर पैदल यात्रा करते है। भीषण ठण्ड में भी लकड़ी के पटिये पर ही सोते है। रजाई-गादी-तकिये सहित सारी सुख-सुविधाओं का इनका त्याग होता है। उच्च शिक्षित युवा संत अपनी आत्मा की खोज में दिन-रात आध्यात्मिक चर्चा में ही अपना समय देते है। उल्लेखनीय है कि सिद्धवरकूट कमेटी के आग्रह पर समस्त संत तीन दिन में 100 किमी का घने जंगल में पगडंडी विहार कर सिद्धवरकूट में 13 दिसम्बर को सायं 4 बजे प्रवेश कर रहे है। संपूर्ण निमाड़ में युवा दिगम्बर संतों के दर्शन व सिद्धवरकूट महामहोत्सव के प्रति अपूर्व उत्साह व्याप्त है।

पैदल पगडंडी विहार में निमाड़ के अनेकों श्रावक चल रहे है। भोपाल, छिंदवाड़ा, इन्दौर, दिल्ली से भी श्रद्धालु जंगल में अपनी राते व्यतीत कर आचार्य संघ का सान्निध्य प्राप्त कर रहे है। महोत्सव के मुख्य संयोजक आशीष चौधरी, समन्वयक ट्रस्टी अमित कासलीवाल, कमेटी अध्यक्ष प्रदीप कासलीवाल, वर्किंग ट्रस्टी बाबूलाल जैन, महामंत्री विजय काला, आचार्य संघ विहार व्यवस्था के मुख्य संयोजक मुकेश जैन ‘पेप्सी सहित पदाधिकारियों ने पधारकर पुण्यार्जन करने की अपील की है।

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