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व्यापम: नम्रता डामोर की मौत का मामला फिर सुर्खियों में

Namrata-Damorभोपाल – व्यापम घोटाले से जुड़ी 19 साल की मेडिकल छात्रा नम्रता डामोर की 2012 में हुई मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में जगह बना चुका है। मृत छात्रा के पिता का इंटरव्यू करने गए एक टीवी पत्रकार की हाल ही में की गई हत्या के बाद नम्रता दामोर का मामला फिर से खबरों में आ गया है।

बढ़ते दबाव के बाद उज्जैन के पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह वर्मा ने आज बताया कि नम्रता डामोर की मौत की फिर से जांच कराने के आदेश दिए गए हैं। तराना के पुलिस अनुविभागीय अधिकारी आर के शर्मा इस मामले की जांच करेंगे।

नम्रता डामोर पर आरोप था कि उन्हें व्यापम घोटाले के जरिए मेडिकल में प्रवेश मिला है। जनवरी 2012 में उज्जैन में रेलवे पटरी पर उनकी लाश बरामद की गई थी। 2014 में पुलिस ने नम्रता मामले की फाइल बंद करने की अपनी रिपोर्ट जमा की। पुलिस ने अपनी जांच में नम्रता की मौत को आत्महत्या बताकर जांच बंद कर दी थी। ऑटोप्सी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि नम्रता का गला दबाया गया था।

9 जनवरी 2012 को 3 डॉक्टरों द्वारा दस्तखत किए गए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नम्रता की मौत बुरी तरह गला दबा दिए जाने के कारण हुई। इसके बावजूद पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि नम्रता की मौत ट्रेन से गिरने के कारण हुई।

नम्रता इन्दौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति मेडिकल कॉलेज की छात्रा थी और यह संदेह था कि उन्होंने व्यापम में प्रवेश कराने वाले गिरोह की मदद से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था।

हाल ही में पत्रकार अक्षय सिंह जब नम्रता के झाबुआ स्थित घर पर उनके पिता का इंटरव्यू ले रहे थे उसी समय अचानक उनके मुंह से झाग बाहर आने लगा और उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने शुरू में कहा कि दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई है। हालांकि बाद में अक्षय के परिवार के दबाव के बाद दिल्ली के AIIMS अस्पताल में फिर से डॉक्टरों की एक टीम उनकी मौत के कारणों की जांच की जा रही है।

व्यापम मामले में चारों ओर से दबाव के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को अपने पुराने रुख से पलटते हुए इस मामले में हाई कोर्ट से सीबीआई द्वारा जांच कराने का आदेश देने का अनुरोध किया।

पिछले कुछ दिनों में व्यापम से जुड़े लोगों की एक-के-बाद-एक मौत के मामलों पर विपक्ष के तीखे हमले और जनता के आक्रोश से घिरे चौहान द्वारा एक संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा किए जाने के बाद राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से इस मामले में सीबीआई जांच के लिए निर्देश देने का आग्रह किया।

मंगलवार को ही संबंधित घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने घोटाले में शीर्ष अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच कराने के लिए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और तीन अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर 9 जुलाई को सुनवाई करने की सहमति दी।

;- एजेंसी 

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