बुरहानपुर :मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के अंतर्गत आने वाले नेपानगर के अंबाडा क्षेत्र के ग्राम उमरदा में चार दिन बाद तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गया। वन विभाग ने तेंदुए काे पकड़ने के लिए गांव में चार पिंजरे लगाए थे, जिनमें मुर्गियां बांधकर रखी थीं। मुर्गी को देख तेंदुआ पिंजरे में घुसा और कैद हो गया।

ग्रामीणों अनुसार तेंदुए का पूरा परिवार है, उन्होंने गांव में दो तेंदुओं को देखा है। शनिवार सुबह भी तेंदुआ गांव में आया था। ग्रामीणों ने दूर से वीडियो-फोटो शूट किया था। शुक्रवार शाम को गांव की एक पहाड़ी पर तेंदुए को देख ग्रामीण दहशत में आ गए थे। थोड़ी देर बार तेंदुआ यहां से छलांग लगाकर ताप्ती नदी किनारों के जंगल के नालों में चला गया था।

एसडीओ बुरहानपुर शरद दुबे ने बताया कि तेंदुओं को पकड़ने के लिए चार पिंजरे अलग-अलग जगहों पर लगाए गए थे, जिसमें हमने मुर्गी बांध दी थी। रात में एक तेंदुआ मुर्गी खाने के चक्कर में फंस गया। तेंदुए की उम्र एक साल के करीब लग रही है। ग्रीमाणों के अनुसार कुछ तीन तेंदुए क्षेत्र में देखे गए हैं। तेंदुए का मूवमेंट जिस जगह से हो रहा है वह तालाब के लोवर वाला भाग है। जहां कर्मचारियों का पहुंच पाना दिक्कत भरा है। इसके लिए कैमरे इशु कर दिए गए हैं। इसी से उसी के आने जाने की लोकेशन साफ हो पाएगी। प्रवीण बारी ने बताया पहला पिंजरा अमरई नाले के पास, दूसरा बागनाला पुलिया के पास और अन्य स्थान पर ही रखा है।

ग्रामीणों के अनुसार उक्त तेंदुआ मादा है। उसके साथ करीब एक-एक साल के दो शावक भी हैं। ग्रामीणों के अनुसार जब भी शावक को भूख लगती है तो मादा तेंदुआ गांव की ओर आती है। उन्होंने बताया अब तक तेंदुए ने गांव में एक दर्जन से अधिक कुत्तों एवं कई बकरियों को अपना शिकार बना चुके हैं।

उमरदा में नौ महीने पहले भी नाइट वीजन वाले चार कैमरे लगाए थे, जिसमें तेंदुए की मूवमेंट देखी गई थी। वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद 20 दिनों तक पिंजरे लगाकर रखे थे, जिसमें 29 अक्टूबर 17 को वन विभाग की टीम ने बकरी को पिंजरे में बांधकर तेंदुए को पकड़ लिया था। ग्रामीणों ने वन विभाग से पूर्व की तरह कैमरे लगाने की मांग की है, जिसमें तेंदुए की सही और वास्तविक मूवमेंट का पता लगाया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार रात के समय पशुओं की सुरक्षा के लिए किसान और मवेशी पालक परेशान हो रहे हैं। तेंदुए को मादा बता रहे हैं, क्योंकि उसके साथ करीब एक साल के दो शावक भी देखे गए हैं। मवेशियों की सुरक्षा में तार फेंसिंग करवा रहे हैं। किसी तरह दहशत के साथ रात निकालते हैं। सुबह उठते ही पहले पशुओं को देखते हैं। किसानों का कहना है कि अगर उसे खाना नहीं मिलेगा तो वह अब पालतु पशुओं पर हमला करेगा।