पश्चिम बंगाल में ममता का जादू बरकरार, उपचुनाव में तीनों सीटों पर जमाया कब्जा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की तीन विधानसभा सीटों पर 25 नवंबर को हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। टीएमसी ने तीनों सीटों पर कब्जा जमा लिया है। ये सीटें हैं पश्चिम मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर, नदिया जिले की करीमपुर और उत्तर दिनाजपुर की कालियागंज। राज्य में मुख्य प्रतिद्वंदी पार्टी के रूप में उभर रही भाजपा को इस उपचुनाव में तगड़ा झटका लगा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की विधानसभा सीट खड़गपुर से भी पार्टी को हार मिली है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के तपनदेव सिन्हा ने कालियागंज विधानसभा सीट पर कब्जा जमा लिया है। उन्होंने दो हजार से ज्यादा मतों से भाजपा प्रत्याशी को हराया है। इस सीट पर पहले कांग्रेस का कब्जा था।

लोकसभा चुनावों के बाद राज्य में यह पहला मौका था जब ये दोनों राजनीतिक दल चुनावी मैदान में एक-दूसरे के आमने-सामने थे। जिन तीन सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना हुई उनमें से एक पर तृणमूल कांग्रेस, दूसरे पर भाजपा और तीसरे पर कांग्रेस का कब्जा था।

लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की 18 सीटों पर विजय प्राप्त करने वाली भाजपा और प्रदेश की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए बंगाल की तीन सीटों पर उपचुनाव की मतगणना अग्निपरीक्षा जैसा था।

जिन सीटों पर उपचुनाव हुआ था उनमें पश्चिम मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर, नदिया जिले की करीमपुर और उत्तर दिनाजपुर की कालियागंज सीटें शामिल हैं। कालियागंज सीट कांग्रेस विधायक प्रमथनाथ राय के निधन से खाली हुई है जबकि खड़गपुर सीट से पिछली बार विधायक चुने गए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने लोकसभा चुनाव जीतने की वजह से इस्तीफा दे दिया था। करीमपुर की तृणमूल विधायक महुआ मित्र ने भी कृष्णनगर संसदीय सीट से जीतने के बाद इस्तीफा दे दिया था।

उपचुनाव में पार्टी की जीत का श्रेय जनता को देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा अपने अहंकार और राज्य के लोगों को अपमानित करने का परिणाम भुगत रही है।

उन्होंने कहा कि हम इस जीत का श्रेय बंगाल की जनता को देते हैं। भाजपा अपने अहंकार और बंगाल के लोगों को अपमानित करने का परिणाम भुगत रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीएम और कांग्रेस खुद को मजबूत करने के बजाय पश्चिम बंगाल में भाजपा की मदद कर रही हैं।