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चुनाव के लिए सुहाग को रखा गिरवी !

mangalsutraएक खबर है कि शहर में एक राष्ट्रीय दल की महिला पार्षद प्रत्याशी ने चुनाव खर्च के लिए अपना मंगल-सूत्र सराफे में गिरवी रख दिया। क्या सुहाग से बड़ी है राजनीति ? क्या सेवा का ज़ज़्बा कुछ ऐसा हिलोरे मार रहा है कि लोग घर लुटाकर भी इसे पूरा करना चाहते है ? या लोग राजनीति की इस चौसर पर सब कुछ दांव पर लगाकर,आगे सब कुछ समेट लेने की मंशा रखते है ?

वाकई इस चुनाव में व्यक्ति से बड़ा पैसा हो गया है। चुनाव में पैसा लेकर टिकट बेचने के आरोप-प्रत्यारोप तो हर दल में लगते है जो कभी पुष्ट नहीं होते लेकिन यह बात तो दबी जुबान दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय दलों नेता स्वीकारते है कि प्रत्याशी चयन में यह अघोषित शर्त पहले ही थी कि पार्षद प्रत्याशियों में अपना चुनावी खर्च खुद उठाने का माद्दा होना चाहिये और महापौर प्रत्याशियों में ना केवल स्वयं का बल्कि सभी पार्षदों का खर्च उठाने की कूबत होनी जरुरी है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने भले महापौर के खर्च की सीमा तय की हो लेकिन पार्टियां इसे कम से कम 2 करोड़ रुपयों का चुनाव मानती है। जाहिर है महापौर और पार्षद पद के लिए इस शहर में अभी जितना करोड़ रुपया खर्च होगा उससे कई गुना फिर इस शहर के लोगों को ही चुकाने के लिए तैयार रहना होगा।

jai nagda– जय नागड़ा
यह लेख श्री जय नागड़ा की फेसबुक वॉल से लिया गया है ।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार है ।

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