जो थके नहीं, रूके नहीं, डिगें नहीं वहीं स्वयंसेवक - Tez News
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जो थके नहीं, रूके नहीं, डिगें नहीं वहीं स्वयंसेवक

RSS KHANDWAखंडवा [ TNN ] स्वयंसेवकों पर विपरीत परिस्थितियों का असर नहीं होता, फिर वे मौसम की या देश की परिस्थितियां हो, कोई फर्क नहीं पड़ता जो थके
नहीं, रूके नहीं, डिगें नहीं वहीं स्वयंसेवक है। संगठन में ही शक्ति है और देव दानवों के युद्ध अनादिकाल से अब तक चले आ रहे आज भी अनेकों राक्षसी शक्तियां देश को अस्थिर करने में लगी है। अनेकों दल संगठन एवं व्यक्ति इस देश में ऐसे है। जिनकी आस्थाओं का केंद्र विदेशों में निहित है लेकिन स्वयंसेवकों के होेते उन्हें नष्ट होना ही पड़ेगा, यही उनकी नियती है। शक्ति ही समस्याओं का समाधान है लेकिन शक्ति दैवीय होना चाहिए, राक्षसी नहीं एवं दुर्बल का कोई भविष्य नहीं होता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शक्ति का प्रकट स्वरूप है। शक्ति के विस्मरण से राष्ट्र एवं समाज दुर्बल हो जाता है। दैवीय शक्तियां सत्ता नहीं सुव्यवस्था स्थापित करती है इसके साथ ही रामायण व महाभारत के अनेक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शौर्य एवं धैर्य से हमारा विकास संभव है। जाति व्यवस्था का समापन होना हिंदूत्व की एकता के लिए अतिआवश्यक है।

उपरोक्त विचार विजयादशमी के अवसर पर निकलने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन के पूर्व बौद्धिक देते हुए मुख्य वक्ता विनोद कुमारजी अखिल भारतीय सहप्रचारक प्रमुख ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारा वनवासी समाज स्वयं सक्षम है। साधन हिनता संकल्प के सामने शिथिल हो जाती है और भारत माता को पुनः विश्व गुरू के स्थान पर प्रतिस्थापित करना ही संघ का संकल्प है। हम सब अपने अपने कार्य में राष्ट्रहित का ध्यान रखे तो यह देश परमवैभव को प्राप्त होगा। इसकी सर्वांगिण उन्नति होगी। सारे अच्छे कार्यों को तत्काल करना एवं बुरे कार्यो को डालना ही अच्छे व्यक्ति की पहचान है, क्योंकि एक कुविचार, बुद्धि, शक्ति व्यक्ति एवं कुल का नाश कर देता है। इसका उदाहरण हमे महाज्ञानी रावण के अंत को देखकर मिलता है। हमे मन के राक्षस पर विजय प्राप्त करना है। देश में फैली हुई असुरी शक्तियों का अंत शीघ्र ही निश्चित है। इस दौरान प्रकाशजी शास्त्री प्रांत कार्यवाह एवं अतुलजी शाह नगर संघचालक मंचासीन थे। संचलन के पूर्व अमृतवचन एवं एकल गीत का प्रस्तुतिकरण भी हुआ। इसके पश्चात संचलन प्रारंभ हुआ। घोष की उत्साहवर्धक स्वर लहरियों पर सर्वप्रथम दंडवाहिनी फिर घोष वाहिनी, ध्वज वाहिनी एवं अन्य स्वयंसेवक अनुशासित रूप से संचलन के रूप में निकले।

संचलन मेडिकल चौराहा, शिवाजी चौक, इमलीपुरा, बडाबम, हरिगंज, मेनहिंदी स्कूल, खड़कपुरा, सराफा जैन मंदिर, घंटाघर, बांबे बाजार, केवलराम चौराहा, फुलगली, ढपालचाल, कहारवाड़ी, बजरंग चौक, विठ्ठल मंदिर, घंटाघर, नगर निगम, जलेबी चौक, कल्याणगंज, लक्कड़ बाजार, भावसार लॉज, दुबे कॉलोनी, हनुमान दालमिल होते हुए पुनः कन्या महाविद्यालय प्रांगण में पहुंचकर समाप्त हुआ। मार्ग में कई स्थानांे पर सामाजिक संगठनों, परिवारों एवं व्यवसायियों द्वारा पुष्पवर्षा कर संचलन का भव्य स्वागत किया गया।

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