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कौन हैं लेनिन, जिनकी मूर्ति तोड़ने की तस्वीरें हो रही वायरल, जाने

त्रिपुरा में रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को ढहाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि बीजेपी के समर्थकों ने साउथ त्रिपुरा डिस्ट्रिक्ट के बेलोनिया सबडिविजन में बुलडोजर की मदद से लेनिन की मूर्ति को गिरा दिया। इससे वामपंथी दल और उनके कैडर नाराज हैं। आइए जानते हैं आखिर व्लादिमीर लेनिन कौन था?

रूस के इतिहास में लेनिन का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। यहां तक कि विश्व की राजनीति को उन्होंने एक नया रंग दिया। रूस को क्रांति का रास्ता दिखाकर सत्ता तक पहुंचाने में व्लादिमीर लेनिन का अहम योगदान था।

व्लादिमीर इलीइच लेनिन का असली नाम ‘उल्यानोव’ था। लेनिन के पिता विद्यालयों के निरीक्षक थे। ग्रेजुएट होने के बाद भी लेनिन ने 1887 में कजान विश्वविद्यालय के विधि विभाग में एडमिशन लिया, लेकिन विद्यार्थियों के क्रांतिकारी प्रदर्शन में हिस्सा लेने के कारण विश्वविद्यालय ने निष्कासित कर दिया।

साल 1889 में उन्होंने स्थानीय मार्क्सवादियों का संगठन बनाया। उसके बाद उन्होंने वकालात शुरू की और मार्क्सवादियों के नेता बने। अपनी क्रांति के दौरान उन्हें जेल में भी जाना पड़ा और उन्होंने कई किताबें भी लिखी।

मार्क्सवादी विचारक लेनिन के नेतृत्व में 1917 में रूस की क्रांति हुई थी। रूसी कम्युनिस्ट पार्टी (बोल्शेविक पार्टी) के संस्थापक लेनिन के मार्क्सवादी विचारों को ‘लेनिनवाद’ के नाम से जाना जाता है।

उस दौरान लोगों के दिल में विश्वयुद्ध को लेकर बहुत गुस्सा था। उसके बाद बोलशेविक खेमे के लोग सरकार के खिलाफ उतर आए। धीरे-धीरे बोलशेविकों ने सरकारी इमारतों में कब्जा करना शुरू कर दिया। इस तरह से सत्ता में बोलशेविक काबिज हो गए। ये रूसी क्रांति थी, जिसने रूस का भविष्य बदल दिया और बोलशेविक सत्ता में आए और व्लादिमीर लेनिन सत्ता में आए।

लेनिन ने बतलाया था कि मजदूरों का अधिनायकतंत्र वास्तव में अधिकांश जनता के लिए सच्चा लोकतंत्र है। उनका मुख्य काम दबाव या जोर जबरदस्ती नहीं बल्कि संघटनात्मक और शिक्षण संबंधी कार्य है।

बाहरी देशों के सैनिक हस्तक्षेपों और गृहकलह के तीन सालों 1928-20 में लेनिन ने विदेशी आक्रमणकारियों और प्रतिक्रांतिकारियों से दृढ़तापूर्वक लोहा लेने के लिए सोवियत जनता का मार्ग दर्शन किया। इसके कारण 1922 में सोवियत संघ की स्थापना हुई।

उन्हें इतिहास के सबसे महान क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है। 54 साल की उम्र में स्ट्रोक की वजह से उनका निधन हो गया।

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