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आखिर आरुषि को किसने मारा, मिस्ट्री की पूरी कहानी

देश ही नहीं दुनिया की चुनिंदा मर्डर मिस्ट्री में शामिल हो चुके आरुषि हत्याकांड में बृहस्पतिवार को फैसला आ गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज अपने फैसले में बेटी आरुषि और हेमराज की हत्या के आरोप मेें जेल में बंद डॉ राजेश तलवार और नूपुर तलवार को बरी कर दिया। गाजियाबाद की विशेष सीबीआइ कोर्ट ने इस मामले में तलवार दंपत्ती को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

कोर्ट के फैसले के बाद सीबीआइ कटघरे में हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अरुषि और हेमराज की हत्या किसने की है। यह भी प्रश्न सामने आ रहा है कि सीबीआइ से इस मामले में कहां चूक हई। सीबीआइ ने इस मामले में जो सबूत पेश किए, उसे कोर्ट ने क्यों नकार दिया?

कोर्ट के फैसले के बाद सीबीआइ कटघरे में हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अरुषि और हेमराज की हत्या किसने की है। यह भी प्रश्न सामने आ रहा है कि सीबीआइ से इस मामले में कहां चूक हई। सीबीआइ ने इस मामले में जो सबूत पेश किए, उसे कोर्ट ने क्यों नकार दिया?

वहीं, हाईकोर्ट के फैसले के बाद लोगों के जेहन में भी सवाल उठ रहा है कि जब राजेश तलवार और नूपुर तलवार बरी हो गए तो आखिर आरुषि की हत्या किसने की। यह सवाल अब सोशल मीडिया में भी उठ रहा है।

लोग सवाल पूछ रहे हैं कि घर में चार सदस्य थे। दो मारे गए और दो बच गए, घर में कोई आया-गया नहीं तो आखिर हत्या किसने की?

यहां पर बता दें कि 15-16 मई, 2008 की आधी रात को नोएडा की पॉश कालोनी जलवायु विहार के L-32 में अपने माता-पिता के साथ रहने वाली आरुषि की लाश कमरे में मिली थी। शुरुआत में इसकी जांच यूपी पुलिस कर रही थी, लेकिन मामले की गंभीरता और यूपी पुलिस पर उठते सवालों के बीच यह मामला सीबीआइ को सौंप दिया गया था।

आरुषि केस : कब क्या हुआ?
2008
16 मई : 14 साल की आरुषि बेडरूम में मृत मिली
हत्या का शक घरेलू नौकर हेमराज पर गया
17 मई : हेमराज का शव घर के टैरेस पर मिला
23 मई : दोहरी हत्या के आरोप में डॉ राजेश तलवार गिरफ़्तार
1 जून : सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली
13 जून : डॉ तलवार का कंपाउंडर कृष्णा गिरफ़्तार
बाद में राजकुमार और विजय मंडल भी गिरफ्तार
तीनों को दोहरे हत्या का आरोपी बनाया गया
12 जुलाई : राजेश तलवार डासना जेल से ज़मानत पर रिहा
10 सितंबर, 2009-
मामले की जांच के लिए नई सीबीआई टीम
12 सितंबर : कृष्णा,राजकुमार और मंडल को ज़मानत,
सीबीआई 90 दिन में नहीं दे पाई चार्जशीट
29 दिसंबर, 2010
सबूतों के अभाव में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट
रिपोर्ट में तलवार दंपत्ति आरोपी नहीं थे
परिस्थितिजन्य सबूतों से क़ातिल होने का इशारा
25 जनवरी, 2011
क्लोजर रिपोर्ट के ख़िलाफ राजेश तलवार का प्रोटेस्ट पिटीशन
कोर्ट ने भी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं किया
लेकिन रिपोर्ट के आधार पर आरोप तय किए
तलवार दंपत्ति को सुप्रीम कोर्ट तक भी राहत नहीं
2012
11 जून : सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई शुरू
2013
10 अक्टूबर: आखिरी बहस शुरू
25 नवंबर : विशेष अदालत ने तलवार दंपत्ति को दोषी करार देते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई
2014
जनवरी : निचली अदालत के फ़ैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती
2017
8 सितंबर : इलाहाबाद हाइकोर्ट ने अपील पर फैसला सुरक्षित रखा

 

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