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मुंबई में क्यों डटे हज़ारो किसान? जाने

मुंबई : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में करीब 30 हजार किसान अपने खेतों को छोड़कर सड़कों पर हैं। मुंबई से करीब 150 किलोमीटर दूर नासिक से चला किसानों का यह रेला आजाद मैदान में जमा है। यहां से ये किसान विधानसभा घेरने के लिए निकलेंगे। बताया जा रहा है कि बच्चों की परीक्षा को देखते हुए किसानों ने 11 बजे के बाद प्रदर्शन का फैसला किया है।

किसानों के इस कूच को लेकर महाराष्ट्र में जहां राजनीति गर्म है, वहीं पुलिस भी टेंशन में है। आज 1993 के बम धमाकों की 25वीं बरसी भी हैं। ऐसे में पुलिस के लिए चुनौतियां दोहरी हैं। करीब 45 हजार पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, एसआरपी और रैपिड ऐक्शन फोर्स को भी अलर्ट पर रखा गया है।

पुलिस की कोशिश है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों को विधानसभा से दो किलोमीटर पहले ही रोक दिया जाए। इसको देखते हुए वहां भारी पुलिस बंदोबस्त किया गया है।

क्या हैं किसानों की मांगें

कृषि उपज की लागत मूल्य के अलावा 50 प्रतिशत लाभ दिया जाए।
सभी किसानों के कर्ज माफ किए जाएं ।
नदी जोड़ योजना के तहत महाराष्ट्र के किसानों को पानी दिया जाए।
वन्य जमीन पर पीढ़ियों से खेती करते आ रहे किसानों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाए।
संजय गांधी निराधार योजना का लाभ किसानों को दिया जाए।
सहायता राशि 600 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह की जाए।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

CM फडणवीस ने दिया बातचीत का न्योता

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसान नेताओं को बातचीत का न्योता दिया है। वह किसान नेताओं के शिष्टमंडल के साथ सोमवार को किसानों की मांगों पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री के दूत के रूप में जल संपदा मंत्री गिरीश महाजन ने विक्रोली में किसानों का स्वागत किया।

नासिक से मोर्चा लेकर आ रहे किसानों को महाजन ने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री किसान नेताओं से बातचीत के लिए तैयार हैं। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार लिखित में आश्वासन नहीं देगी, तब तक मोर्चा वापस नहीं होगा और मांगें मानी जाने तक विधान भवन का घेराव जारी रहेगा।

गिरीश महाजन के साथ बैठक में किसान नेता अजीत नवले, अशोक ढवले, शेकाप के जयंत पाटील, कपिल पाटील और जीवा गावित शामिल थे।

‘डैमेज कंट्रोल’ में लगी महाराष्ट्र सरकार

इससे पहले नासिक से चला किसान मोर्चा रविवार को मुंबई में दाखिल हो गया। किसान मोर्चे से घबराई सरकार ने ‘डैमेज कंट्रोल’ की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। मुख्यमंत्री की किसानों से चर्चा से पहले कृषि मंत्री पांडुरंग फुंडकर को अकोला से तत्काल मुंबई आने का निर्देश दिया।

रविवार रात में किसानों के मुद्दे पर भाजपा सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक भी बुलाई गई। किसानों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस ने रात में अपने बंगले पर उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया। उसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री सोमवार को दोपहर 12 बजे किसान नेताओं से मिलेंगे।

किसानों से चर्चा करने के लिए छह मंत्रियों की समिति बनाई गई है। इसमें भाजपा के मंत्री चंद्रकांत पाटील, गिरीश महाजन, पांडुरंग फुंडकर, विष्णु सावरा, सुभाष देशमुख और शिवसेना के मंत्री एकनाथ शिंदे को शामिल किया गया है।

सियासत तेज, शिवसेना, कांग्रेस, MNS किसानों के संग

किसान मोर्चे को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने समर्थन देने का ऐलान किया है। एनसीपी चीफ शरद पवार ने तो पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे और विधान परिषद में नेता विपक्ष धनंजय मुंडे को पार्टी की तरफ से मोर्चे में शामिल होने को कहा है।

वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे और शेकाप के जयंत पाटील ने किसानों को समर्थन देने की घोषणा की है।

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे विक्रोली में मोर्चे में शामिल हुए। राज ठाकरे भी किसानों से मिलने पहुंचे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा कि मुख्यमंत्री को चाहिए कि वह अपनी जिद छोड़कर किसानों से बातचीत करें और उनकी मांगों को मानकर कदम उठाएं। किसान मोर्चे का मुंबई में जगह-जगह स्वागत किया जा रहा है। ठाणे में शिवसेना नेता और राज्य के मंत्री एकनाथ शिंदे ने किसान मोर्चे का स्वागत किया।

ट्रैफिक में बदलाव

मंत्रालय में आत्महत्या करने वाले किसान धर्मा पाटील का बेटा नरेंद्र पाटील भी किसानों के साथ मोर्चे में शामिल है। किसान मोर्चे के कारण सोमवार को सुबह 9 बजे से रात 11 बजे तक ईस्टर्न एक्सप्रेस-वे पर बड़े वाहनों के लिए यातायात प्रतिबंधित कर दिया गया।

छोटे वाहनों के लिए एक तरफ का मार्ग चालू रहेगा, लेकिन 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही वाहन चलाने की अनुमति है। कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) अमितेश कुमार ने कहा कि किसानों के मार्च को लेकर किसी रोड को बंद नहीं किया जाएगा न ही कोई डायवर्ज़न होगा।

क्या हैं स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें

18 नवंबर 2004 को केंद्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया गया था।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में किसानों के जीवन-स्तर सुधारने के लिए कई सिफारिशें की थीं।
आयोग ने अपनी सिफारिश में फसल उत्पादन मूल्य से पचास फीसदी ज्यादा राशि किसानों को देने की बात कही थी।
किसानों के लिए अच्छी क्वालिटी के बीज कम कीमत में उपलब्ध कराने की सिफारिश थी।
गांवों में किसानों की मदद के लिए विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाने की पहल की सिफारिश।
महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं।
कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को मदद मिल पाए।
अतिरिक्त और बेकार भूमि का किसानों के बीच वितरण हो।
खेतिहर जमीन और वनभूमि को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए कॉरपोरेट को न दिया जाए।
फसल बीमा की सुविधा पूरे देश में हर फसल के लिए मिले।
सरकार की मदद से किसानों को दिए जाने वाले कर्ज पर ब्याज दर कम करके चार फीसदी किया जाए।

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