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Exclusive: शिव के “राज” में शराबबंदी क्यों नहीं ?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से शराब की सभी दुकानें बंद कर शराबबंदी लागू की जायेगी। प्रदेश में चल रही नर्मदा सेवा यात्रा के 113वें दिन नरसिंहपुर जिले के ग्राम नीमखेड़ा में जनसंवाद कार्यक्रम में रविवार शाम चौहान ने कहा, ‘‘प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से शराब की सभी दुकानें बंद कर शराबबंदी लागू की जायेगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रथम चरण में नर्मदा नदी के दोनों तटों पर पांच-पांच किलोमीटर तक शराब की दुकानें एक अप्रैल से बंद कर दी गयी हैं। अगले चरण में अब रिहायशी इलाकों, शिक्षण संस्थाओं और धार्मिक स्थलों के पास शराब की दुकानें नहीं खुलेंगी।’’जब सरकार शराबबंदी के पक्ष में है, तो इस ही वित्तीय वर्ष में इसे लागू क्यों नही किया गया? क्या सरकार राजस्व घाटे को लेकर फैसला लेना नहीं चाहती है?

राज्य में शराब की सालाना खपत
देशी शराब – 1103 लाख लीटर
विदेशी शराब – 453 लाख लीटर
बीयर – 986 लाख लीटर

राज्य सरकार को शराब पर आबकारी कर के माध्यम से 7300 करोड़ प्रतिवर्ष आय प्राप्त होती है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्रदेश सरकार को शराब से 7926.29 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार ने आबकारी विभाग के वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए लगभग 15 फीसदी बढ़ोतरी के साथ-साथ करीब आठ हजार पचास करोड़ रुपए का लक्ष्य प्राप्त कर रखा है। इस भारी भरकम आय वाले कारोबार को यह सरकार कैसे बंद कर पाएगी इसको लेकर कई तरह की चर्चाए व्याप्त हैं तो वहीं सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि यदि शराब बंदी होगी तो इतना राजस्व कहां से आएगा।

क्या आगामी विधानसभा और लोकसभा के मद्देनजर शराबबंदी के फैसले को अगले वित्तीय वर्ष में लाभ प्राप्त करने के लिए लागू करेगी | कही न कही शराबबंदी को लेकर सरकार के द्वारा स्पष्ट जवाब का न मिलना चुनावी राजनीति को भी दर्शाता है। प्रदेश में हाईवे पर शराब की दुकानों को बंद करवा कर सटी बस्तियों में खुलवाये जाने का पुरे प्रदेश में विरोध हो रहा है । और यह शराबबंदी की आग चिंगारी बनकर पुरे प्रदेश में फैल रही हैं । जगह-जगह शहर गाँव कस्बो में खुली शराब की दुकानों को महिलाए बंद करवा रही हैं ।

पिछले पांच साल में ऐसे बढ़ा शराब से सरकार का राजस्व
वर्ष – राजस्व
2011-12 – 4314.93
2012-13 – 5083.19
2013-14 – 5908.05
2014-15 – 6697.42
2015-16 – 7926.29
(नोट – आय करोड रुपए में)

गुजरात और बिहार के बाद अब मध्यप्रदेश में भी शराबबंदी को लेकर महिलाए एकजुट होने लगी है । लगातार एक सप्ताह से अलग अलग शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़को पर महिलाए शराबबंदी के लिए प्रदर्शन और तोड़फोड़ तक शुरू कर दी हैं । सुप्रीमकोर्ट ने हाल ही में एक फैसला सुनाया था । पुरे देश में जितने भी नेशनल हाईवे है, वहा शराब की दुकाने नही होंगी । हाईवे के किनारे स्थित शराब दुकानों ही नहीं बार और रेस्तरां में भी शराब नहीं बेची जा सकेगी। हालांकि किसी स्थानीय निकाय क्षेत्र से गुजरने वाले हाईवे पर, जहां 20 हजार से कम जनसंख्या है, वहां यह सीमा 500 से घटाकर 220 मीटर की गई है। हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था। इन सभी बातों के मद्देनजर प्रदेश में इन खबरों को बल मिलने लगा कि प्रदेश सरकार मध्यप्रदेश में शराबबंदी लागू करने जा रही है। मगर अभी पूरी तरह से शराबबंदी प्रदेश में लागू नही की गयी है |

मध्यप्रदेश सबसे ज्यादा शराब की खपत वाले टॉप 10 जिले
जिला – खपत (लाख लीटर)
इंदौर – 78.18
जबलपुर – 46.07
उज्जैन – 43.21
भोपाल – 40.07
सागर – 38.79
ग्वालियर – 36.07
धार – 27.23
छिंदवाड़ा – 21.63
खरगौन – 19.55
रीवा – 18.60
नोट – (खपत के आंकड़े 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2015)

शराब के कारण राज्य में अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है वहीं शराब पीने से लोगों के परिवार भी बर्बादी के कगार पर पहुंच जाते है, इसे प्रदेश सरकार भी कही न कही मानती हैं। मगर यह कहा तक न्याय उचित है, की हाईवे से शराब की दुकानों को हटाकर रिहायशी इलाकों में स्थापित कर दिया जाय? गुजरात और बिहार की तरह मध्यप्रदेश में शराबबंदी का फैसला क्यों नही लिया गया ? रिहायशी इलाकों, शिक्षण संस्थाओं और धार्मिक स्थलों के पास शराब की दुकानें को वर्तमान में ही बंद क्यों नहीं किया जा रहा है | आम जनता शराब को लेकर और कितनी परेशान होगी। शिवराज सरकार को जनता के हितो को ध्यान में रखते हुए तुरंत शराबबंदी प्रदेश में लागू करनी चाहिये। ना की राजस्व और आगामी विधानसभा और लोकसभा के मद्देनजर शराबबंदी के फैसले को अगले वित्तीय वर्ष में लाभ प्राप्त करने के लिए लागू करे |

देश और मधयप्रदेश में शराब के कारण होने वाली मौतों के आंकड़े

देश भर में शराब बंद होने मुद्द् पर बहस छिड़ी हुई है। 2013 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों द्वारा किए विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में शराब से प्रतिदिन 15 लोग या हर 96 वें मिनट पर एक भारतीय की मौत होती है। भारत में, प्रति व्यक्ति शराब की खपत में 38 फीसदी की वृद्धि हुई है, 2003-05 में 1.6 लीटर से 2010-12 में 2.2 लीटर हुआ है। यह आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में सामने आए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 11 फीसदी से अधिक भारतीय शराब के प्रभाव में आए हैं। इस संबंध में वैश्विक औसत 16 फीसदी है । यह आंकड़े शराब के खिलाफ व्यापक राजनीतिक समर्थन होने की ओर इशारा करती है | एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, शराब संबंधित होने वाले मौतों में सबसे पहला स्थान महाराष्ट्र का है। इसी संबंध में मध्यप्रदेश और तमिलनाडु का स्थान दूसरे एवं तीसरे नंबर पर है। मप्र को शर्मसार करने वाले यह आंकड़े नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा वर्ष 2014 के सड़क हादसों को लेकर जारी रिपोर्ट मे सामने आए है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में सड़क हादसों की ग्राफ पिछले कुछ सालों की तुलना में वर्ष 2014 में 2.9 फीसदी बढ़ा है। इस दौरान देश में कुल साढे चार लाख सड़क हादसे हुए। जिसमें 1.41 लाख लोगों की मौत हो गई।जबकि करीब दो लाख से ज्यादा लोग इस हादसों में अपंग भी हो गए। एक सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी से ज्यादा सड़क हादसों में ड्राइवर की गलती होती है। ज्यादातर हादसे ओवर स्पीड, लालबत्ती की अनदेखी, गाड़ी चलाते हुए मोबाइल पर बात करना और नशे में गाड़ी चलाने के कारण होते हैं।

प्रदेश में लगातार बढ़ रही है शराब की खपत
प्रदेश में शराब की खपत में लगातार इजाफा हो रहा है। हर रोज औसत 7 लाख लीटर शराब की खपत है। बीते वित्तीय वर्ष 2015-16 में राज्य सरकार को शराब से 7926.29 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। वर्ष 2016-17 में सरकार को साढ़े आठ हजार करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है। पिछले पांच सालों में यह कमाई दो गुनी हो चुकी है। वहीं शराब की खपत में ढ़ाई गुना वृद्धि हुई है।

 स्पेशल रिपोर्ट @गौरव दफ्तरी 

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