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स्मृति ईरानी फेसबुक पर क्यों बोलीं मुझे आंटी नेशनल कहो ?

smriti-iraniनई दिल्ली- ‘डियर’ कहने पर सोशल मीडिया पर हाल ही में एक बहस में उलझने के बाद एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी ने अब खुद को ‘आंटी नेशनल’ कहा है। साथ ही खुद को आलोचना का सामना करने वाला भी बताया है। बता दें कि स्मृति को बीते मंगलवार को बिहार के एक मिनिस्टर ने “डियर’ कहा था, जिस पर उन्होंने एतराज जताया था।

बता दें कि बीते दिनों एक अंग्रेजी अखबार में स्मृति ईरानी को ‘आंटी नेशनल’ से संबोधित किया गया था ! ईरानी ने फेसबुक पर लिखा है कि उनकी परवरिश मध्यम वर्गीय परिवार में हुई है ! उन्होंने लिखा है, ‘बड़ी होती लड़कियों को सिखाया जाता था कि लड़के अगर छेड़ते भी हैं तो उनका जवाब मत दो क्योंकि उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा ! उन्होंने लड़कियों से कहा कि सिर झुकाने की जगह ऊपर देख कर बोलना शुरू करो !’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लेकिन वह तब भी कुछ विद्रोही होती थीं, जो सवाल करती थीं कि क्यों नहीं बोलें, क्यों मुंह बंद रखें !

बता दें है कि ट्व‍िटर पर अशोक चौधरी के स्मृति को ‘डियर’ कहकर संबोधि‍त किया था, जिस पर वह भड़क गईं ! स्मृति इरानी ने अपनी पोस्ट में उस मानसिकता का जिक्र किया है, जिसमें औरत की मेहनत के बाद भी लोग उस पर आरोप लगाते हैं ! बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को ‘डियर’ कहकर संबोधित किया था जिसके बाद दोनों के बीच ट्विटर पर शब्दयुद्ध छिड़ गया। उधर, अशोक चौधरी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी को ‘डियर’ संबोधित करने के अपने आधार पर डटे हुए हैं। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के आशा भोसले को इस शब्द से संबोधित करने सहित कई संदर्भों का हवाला दिया।

स्मृति ने अपने जवाब में आगे लिखा, ‘लड़की बड़ी होती है, टीवी स्टार बनती है ! लेकिन जब आप सफलता के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं, तब आपको सलाह दी जाती है कि पार्टी में जाओ, लोगों से घुलो-मिलो, तब काम मिलेगा !’ अपने स्ट्रगल के दिनों और हासिल किए गए पदों का जिक्र करते हुए उन्होंने ‘अनपढ़’ शिक्षा मंत्री जैसे आरोपों का भी जवाब दिया !

स्मृति ने अपने इमोशनल फेसबुक पोस्ट में लिखा है, ‘जब आप सफल स्टार होती हैं, जब आप बेरोजगार नहीं होतीं और अपनी सफलता की ऊंचाई पर होती हैं, तब आपको लड़ने के लिए कठिन लड़ाई दी जाती है ! उन्होंने लिखा, ‘राजनीति में पदार्पण से पहले आपको एक समझदारी भरी सलाह दी जाती है, जबतक आपके पास अपने पत्रकारों की मंडली न हो तब तक संपादकीय में किसी तरह के समर्थन की उम्मीद न करो !’

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