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कैशलेस ट्रांजेक्शन पर मिल सकती हैं 2 फीसदी छूट

नई दिल्लीः कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार इस पर 2 फीसदी छूट देने का विचार कर रही है। इसके लिए दिसंबर में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में फैसला लिया जाएगा। यह छूट केवल कुल बिल पर उन्हीं लोगों को मिलेगी जो बिल का भुगतान करने के लिए डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और ई-वॉलेट का इस्तेमाल करेंगे।

GST में मिलेगी छूट
हालांकि ये छूट लोगों को उनके जीएसटी पर मिलेगी। इसमें एक फीसदी छूट सीजीएसटी पर और एक फीसदी छूट एसजीएसटी पर मिलेगी। बिजनेस स्टैण्डर्ड के मुताबिक, वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इससे टैक्स की चोरी कम होगी। इसमें कुल बिल पर अधिकतम 100 रुपये की छूट मिलेगी।

फिर लगेगा इतना टैक्स
इस हिसाब से 5 फीसदी स्लैब में आने वाली वस्तुओं पर 3 फीसदी, 12 फीसदी स्लैब वाली वस्तुओं पर 10 फीसदी, 18 फीसदी स्लैब वाली वस्तुओं पर 16 फीसदी और 28 फीसदी स्लैब में आने वाली वस्तुओं पर केवल 26 फीसदी जीएसटी लगेगा।

पेश की जाएंगी दो कीमतें
उपभोक्ताओं को दो कीमतों की पेशकश की जाएगी। इनमें से एक में नकद भुगतान के साथ खरीदारी करने पर सामान्य जीएसटी दर लगेगा जबकि डिजिटल भुगतान पर जीएसटी में 2 फीसदी की छूट मिलेगी।

इस छूट का मतलब यह है कि सरकार को राजस्व की चिंता छोडऩी पड़ेगी लेकिन उसे उम्मीद है कि अनुपालन दर में सुधार और मांग में सुधार से इसकी भरपाई हो जाएगी।जीएसटी परिषद की 10 नवंबर को गुवाहाटी में हुई पिछली बैठक के एजेंडे में भी यह प्रस्ताव शामिल था लेकिन इस पर चर्चा नहीं हो सकी।

सरकार उन कारोबारियों को भी फायदा देंगें जो जीएसटी नेटवर्क से जु़ड़े हुए हैं। अगर कोई कारोबारी अपना टैक्स भी ऑनलाइन भरता है, तो उसको भी टैक्स में छूट देने के साथ-साथ कैशबैक या फिर अलग से इनाम दिया जा सकता है।

कार्ड स्वाइप करने पर मिल सकती है छूट
अभी अगर कोई व्यक्ति अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड के जरिए स्वाइप मशीन के जरिए पेमेंट करता है, तो बैंक दुकानदार से कुल अमाउंट का 1 फीसदी चार्ज लेता है। इस वजह से दुकानदार 200 रुपये तक का छोटा पेमेंट कार्ड से नहीं लेते हैं। बड़ा पेमेंट क्रेडिट कार्ड से स्वाइप कराने पर 1 फीसदी चार्ज लेते हैं।

 बढ़ा डिजिटल लेनदेन
नोटबंदी ने भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अन्य देशों के मुकाबले तीन वर्ष आगे पहुंचा दिया है। बाजार में चल रहे विभिन्न प्रकार के प्रीपेड उपकरण जैसे मोबाइल वॉलेट, पीपीआई कार्ड, पेपर वाउचर और मोबाइल बैंकिंग में भी एक साल पहले के मुकाबले 122 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

डिजिटल भुगतान बना रीढ़ 
उल्लेखनीय है कि भारत की उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी और डिजिटल भुगतान रीढ़ की हड्डी है। देश के टोल प्लाजा, बस, रेलगाड़ी, सिनेमा टिकट आदि की खरीदारी, ई-कामर्स साइट से ऑनलाइन खरीदारी, पेट्रोल पंप, रेस्तरां आदि में करीब 15 करोड़ भारतीय नियमित रूप से डिजिटल साधनों से भुगतान कर रहे हैं।

इस समय करीब एक करोड़ कारोबारी भी डिजिटल भुगतान स्वीकारने में सक्षम हैं। मान लिया जाए कि यदि हर डिजिटल भुगतान करने वाला यदि हर महीने करीब तीन हजार रुपये भी इस तरीके से खर्च करता है तो हम रोजाना लगभग एक करोड़ लेन देन डिजिटल तरीके से करते हैं।

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