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किस ओर बढ रहा बिहार ?

bihar questionsविकास के नाम पर शुरु हुई बिहार की चुनाव यात्रा जैसे – जैसे आगे बढी वैसे –वैसे इस यात्रा ने अपना मार्ग बदलकर बयानी यात्रा का ऐसा मार्ग चुना जिसकी कल्पना भी नहीं की जा रही थी। और ऐसे-ऐसे उदाहरण देखने को मिले जो किसी भी चुनाव मे देखने को नहीं मिले थें। चारा चोर , भूत पिश्चास ,मण्ङल से कमण्ङल और सुशासन से कुशासन के बयानी वार में जनता को ऐसा उलछाया गया कि एक बार फिर बिहार चुनाव मे जातिवाद का नमूना देखने को मिला और जातिवाद का परचम लहराया। पर ये जनता का फैसला था इसीलिए कुछ किया भी नहीं जा सकता हैं, और इसी फैसले के फलस्वरुप दो दुश्मन दोस्त बनकर सत्ता की बागङोर सम्भाले हुए हैं ।

बिहार की जनता की उम्मीदों के फलस्वरुप उम्मीद की जा रहीं थी कि जंगलराज की स्थिति उत्त्पन नहीं होगी परन्तु हाल की घटनाओं को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता हैं कि जंगलराज की स्थिती नहीं आई हैं । बिहार चुनाव में जिन महिलाओं मतदाताओं की भागीदारी सबसे ज्यादा रहीं थी ,आज उन्हीं महिलाओं मतदाताओं पर सबसे ज्यादा अपराध की घटनाएं हो रहीं हैं और अपराधियों द्वारा गर्ल्स होस्टल को भी निशाना बनाया जा रहा हैं और उन पर पथरबाजी की घटनाएं समाने आ रहीं हैं , परन्तु इन सबसे परे इस महागठबन्धन की सबसे बङी पार्टी जिसने सबसे ज्यादा सीटें जीती थी वे प्रदेश की उन बेटियों की चिन्ता न करके ,जिन्होने उसे वोट देकर विजयी बनाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ,अपनी पार्टी की बेटी मीसा भारती का भविष्य संवारने मे लगी हैं । पार्टी मीसा भारती को राज्यसभा में भेजने की तैयारी कर रहीं हैं।

जुलाई 2016 में राज्यसभा की 5 सीटें खाली होने से सबकी उम्मीदों को पंख लग गये हैं कि कौन – कौन राज्यसभा मे भेजा जायेगा और अपनी उम्मीदों को पंख देने की व्यस्ता मे पार्टी नेता ऐसे व्यस्त हैं कि जनता की उम्मीदों को भूल हीं गये हैं और अब जनता की उम्मीदे भी नाउम्मीद मे बदलती दिख रहीं हैं । पूरे बिहार ने जिस सुशासन पुरुष पर भरोसा करके सुशासन के लिये वोट दिया था उसी सुशासन पुरुष का शासन काल बठते अपराध के कारण कुशासन के मार्ग पर बठता दिखाई दे रहा हैं । अपराध ,लूट , हत्या के कारण एकबार फिर बिहार की जनता के मन मे जंगलराज की छवि उभरने लगी हैं, परन्तु इन सबसे परे हर बार की तरह इस बार भी समस्या के समाधान के स्थान पर पार्टी अपनी सियासी बयानबाजी मे व्यस्त हैं पर इस बार की बयानबाजी मे थोङी अलग तस्वीरे देखने को मिल रही हैं। इस बार लङाई पक्ष – विपक्ष मे नहीं हैं बल्कि दुश्मन से दोस्त बने दो सहयोगियों मे हैं। लालू जो हर बार नीतिश के पीछे ठाल बने खङे रहते थे इस बार वह भी इस बयानी वार मे कूद पङे और फिर जो बयानी वार का सिलसिला शुरु हुआ हैं ,उसे देखकर ऐसा लग रहा हैं कि दो सहयोगी नहीं बल्कि पक्षी -विपक्षी लङ रहे हैं ।

राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद ने कहा कि जीत कि खुशी मे नीतिश मस्त हैं और जनता त्रस्त्र हो रही हैं और तो और उन्होने नीतिश पर सीधा आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि जो ङ्राइविंग सीट (मुख्यमन्त्री)पर बैठा होता हैं , सभी घटनाओं के लिये उसकी ही जिम्मेदारी होती हैं । इन आरोप को भला जदयू कैसे चुप चाप सह सकती थी ,आखिर उनके सुशासन पुरुष पर जो सवाल उठाये गये थे तो उन्होने भी राजद को जवाब देने के लिये संजय सिंह को उतार दिया और जवाब देते हुए कहा कि नीतिश को काम का अनुभव हैं इसीलिए उन पर सवाल नहीं उठाये जाने चाहिए । इन दोनो की आपसी बयान बाजी मे आखिर विपक्षी के बयानो की कमी देखकर भाजपा ने भी अपने बयानो से उपस्थिती दर्ज करा ली और बयानी बौछार मे अपने भी बयानी तीर चलाने लगी लेकिन इन सब के बीच जनता एक बार फिर जनता अपने अस्तित्व को ठूंठ रहीं हैं। और उसकी स्थिति वही ठाक के तीन पात वाली हो गई हैं ।जिसमे उसको कुछ हासिल होता नहीं दिख रहा हैं ।

सरकार को यह समझना होगा कि अभी चुनाव जीते ज्यादा समय नहीं हुए हैं इसीलिए अगर अभी कोई कोशिश की जाए और अपराध पर नियन्त्रण कर लिया जाये तो ज्यादा ठीक होगा वरना कहीं ऐसा न हों की स्थिति हाथ से निकल जाए और उसे सम्भालना कठिन हो जाए । इस समय महागठबन्धन जो यूपी चुनाव मे जीत के सपने संजोएँ बैठा हैं , उसे समझना होगा कि उसकी जीत का मार्ग इस राज्य मे उसके द्वारा किये गये कामों से ही निर्धारित होगा और अगर हालात ठीक नहीं रहे तो यूपी चुनाव तो दूर की कौङी होगी , जनता के असन्तोष के कारण कहीं बिहार मे सत्ता से हाथ न धोने पङ जाए ।

अभी ज्यादा देर नहीं हुई हैं इसीलिए राजद व जदयू को आपनी आपसी नूराकुश्ती बंद करके सहयोगियों की भांति व्यवहार करना सीखना होगा वरना मौके की ताक मे बैठे रहने विपक्षियों को बैठे बिठाए मुद्दे मिलते रहेगे और वे सत्ता के हस्ताणतरण का प्रयास भी जारी रखेगे इसीलिए थोङी सूझ – बूझ का परिचय देते हुए दोनो पार्टियों को जनहित मे सोचना होगा कि जनता ने उन्हे अपनी सुरक्षा व प्रदेश के विकास के लिये चुना हैं , न कि अपना अहित कराने के लिए । चीङिया के खेत चुगने का इन्तजार करने के स्थान पर अब कार्य करके दिखाने का वक्त आ गया हैं । बिहार की जनता ने जिस सुशासन कुमार पर भरोसा करके अपना कीमती वोट उन्हे दिया था उस सुशासन कुमार को अपनी सुशासन छवि को बनाये रखना चाहिए ।

 

Supriya Singh

लेखिका – सुप्रिया सिंह 
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