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गैर मुस्लिम महिलाओं के साथ महिला इमाम ने दी अजान !

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कोपेनहेगन- डेनमार्क में शुक्रवार को पहली बार किसी महिला इमाम ने मस्जिद में अजान दिया। स्कैंडिनेवियाई मूल की शेरिन खानकन और सलीहा मैरी फेतह इस मस्जिद की इमाम हैं। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, शेरिन ने अजान दी और सलीहा ने ‘इस्लाम और मॉडर्न वर्ल्ड में मुस्लिम महिलाएं’ मुद्दे पर खुतबा पढ़ा। अजान के बाद मस्जिद में 60 महिलाएं पहुंचीं। आधी महिलाएं थीं गैर मुस्लिम…

कोपेनहेगन के सिटी सेंटर स्ट्रीट के फास्ट फूड आउटलेट के ऊपर बनी मरियम मस्जिद अनौपचारिक रूप से फरवरी में खुल गई थी। हालांकि, शुक्रवार को यहां पहली बार महिला इमाम ने अजान दी।

ओपनिंग सेरेमनी में आईं महिलाओं में आधी से ज्यादा दूसरे मजहब की थीं। इन्हें इनविटेशन दिया गया था। वॉलिन्टियर्स ने गुरुवार रात को जुमे की नमाज के लिए तैयारियां की। मस्जिद में बारीक कढ़ाई वाले क्रीम कलर के कर्टन टांगे गए थे।

इसके अलावा कुरान की आयतें भी डिस्प्ले में लगाई गई थीं। मस्जिद को फूलों से भी सजाया गया था। यह मस्जिद पुरुषों और महिलाओं, दोनों के लिए खुली रहेगी। लेकिन शुक्रवार की नमाज सिर्फ महिला इमाम ही अदा करवाएंगी।

यहां अब तक पांच निकाह और कई गैर मजहबी शादियां हो चुकी हैं। मस्जिद में कई तलाक भी करवाए जा चुके हैं। शुक्रवार की नमाज के बाद भी एक कपल का तलाक करवाया गया।

बता दें कि 19वीं शताब्दी में चीन में पहली महिला इमाम बनी थी। साउथ अफ्रीका में ऐसा 1955 में हुआ। इसके अलावा, लॉस एंजिलिस में पिछले साल महिला मस्जिद खोली गई।

ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड में 2009 में पहली बार अमेरिकन इस्लामिक स्कॉलर अमीना वदूद ने शुक्रवार की नमाज अदा करवाई थी।

बता दें कि कई मस्जिदों में महिलाओं के नमाज पढ़ने के लिए अलग जगह होती है। इनकी एंट्री मेन गेट से न होकर दूसरी जगह से होती है।
मस्जिद में छह पेज का मैरिज चार्टर (घोषणापत्र) पेश किया गया। इसमें शादी के लिए चार नियमों का जिक्र है।

ये नियम हैं :
व्यभिचार कोई विकल्प नहीं; महिलाओं को तलाक का अधिकार है; किसी भी तरह के मानसिक और शारीरिक अत्याचार पर निकाह रद्द कर दिया जाएगा और तलाक की कंडीशन में बच्चों को लेकर महिलाओं के पास समान अधिकार है।

पाकिस्तान, ईरान और अरब देशों से आए पॉजिटिव रिएक्शन
शेरिन खानकन ने बताया, “मस्जिद का मुख्य उद्देश्य रिलिजियस इंस्टीट्यूशन में मेल डॉमिनेटिंग सिस्टम को चैलेंज करना है।”

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान, ईरान, यूरोप, तुर्की और अरब देशों से मस्जिद के लिए पॉजिटिव रिएक्शन्स आए हैं।

खानकन ने बताया कि इमाम बनने के लिए उनकी फैमिली ने काफी सपोर्ट किया। हालांकि, कुछ दोस्त और रिश्तेदार उनके इस फैसले के खिलाफ थे।

खानकम के पिता सीरियाई रिफ्यूजी हैं। सीरियाई गवर्नमेंट ने उन्हें काफी टॉर्चर किया, जिसके बाद वे डेनमार्क आ गए।

उनकी क्रिश्चियन मां बतौर नर्स काम करने के लिए फिनलैंड से कोपेनहेगन आई थीं।

उन्होंने बताया, “मैं अलग-अलग रिलिजन और कल्चर में पली-बढ़ी और मेरे इस फैसले के लिए यह काफी मददगार रहा।”

दमिश्क में एक साल तक मास्टर डिग्री की पढ़ाई के बाद वे 2000 में कोपेनहेगन आ गई थीं। [एजेंसी]




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