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क्या इस दुष्कर्म पीड़िता के लिए भी देश करेगा आंदोलन, न्यूड दौड़ती रही सड़कों पर

नई दिल्ली : दिल्ली के पॉश इलाके पांडवनगर में एक इंजीनियर ने अपने चार साथियों संग नेपाल की रहने वाली एक युवती को फ्लैट में बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। विरोध करने पर आरोपियों ने पीड़िता को निर्वस्त्र अवस्था में बाथरूम में बंद कर दिया। वह रात भर मदद के लिए चिल्लाती रही। सुबह मौका मिला तो उसने फ्लैट की पहली मंजिल से छलांग लगा दी। सबसे शर्मनाक पल तो उस वक्त रहा जब पीडि़त युवती बिल्कुल नग्न सड़क पर इधर-उधर भागती रही और लोगों से मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन कोई भी उसे तन ढकने के लिए कपड़ा देने तक सामने नहीं आया। बाद में युवती एक ऑटो में बैठकर थाने पहुंची और पुलिस को घटना से अवगत कराया।

पीड़िता को पुलिस ने लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया है। बाद में उसकी शिकायत पर सामूहिक दुष्कर्म, कुकर्म, मारपीट और जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज कर इंजीनियर और उसके चारो साथियों को गिरफ्तार कर लिया। अन्य चारों आरोपी नोएडा में एक बीपीओ में काम करते हैं। उनकी पहचान नवीन देशमुख, प्रतीक कुमार, विकास मेहरा, सर्वजीत और लक्ष्य के रूप में हुई है।

क्या था पूरा मामला
पुलिस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक 28 वर्षीय नेपाली मूल की पीड़िता परिवार के साथ मुनिरका में रहती है। उसके दो बच्चे हैं। पांडव नगर में रहने वाले नवीन देशमुख की उससे जान-पहचान थी। शनिवार शाम घुमाने की बात कर नवीन धोखे से उसे फ्लैट पर ले आया। यहां चार दोस्त प्रतीक, विकास मेहरा, सर्वजीत और लक्ष्य पहले से मौजूद थे। आरोपियों ने युवती को फ्लैट में बंधक बना लिया। सभी ने पहले शराब पी और जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म किया। एक आरोपी ने अप्राकृतिक यौनाचार भी किया। इसके बाद उसे बाथरूम में बंद दिया।

रविवार सुबह करीब 5:30 बजे पीड़िता पहली मंजिल से नीचे कूद गई। उसके दोनों पैर में चोट आई है। वह ऑटो से पांडव नगर थाने पहुंची तो पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। मामला दर्ज कर पुलिस ने पांचों को अलग-अलग जगह से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

गौर तालाब है की 6 दिसंबर 2012 को दिल्ली में एक चलती बस की पिछली सीट पर जो हुआ उसके बाद लगा था कि अब बहुत हुआ। पूरे देश ने भी बोलकर बता दिया था कि अब फिर कभी ऐसा नहीं होगा। काश 16 दिसंबर के गम और गुस्से के बीच दिल्ली की हैवानियत और दरिंदगी भी बस की उसी पिछली सीट पर दम तोड़ देती तो आज जो हुआ है शायद नहीं होता।

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