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सेक्स चेंज के 4 साल बाद मिली मर्द होने की मान्यता

ये कहानी है CISF के उस जवान की जो पैदा तो लड़की हुई थी, लेकिन जिसके हाव-भाव, नैन नक्श और भावनाएं लड़कों जैसी थी। इस महिला कॉन्स्टेबल के अंदर मर्दों की भावनाएं इतनी भरी हुई थी कि इसने बतौर लड़की शादी से ही तौबा कर लिया था। लेकिन किस्मत कुछ और ही मंजूर था, अंग्रेजी वेबसाइट हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक तब इस महिला कॉन्स्टेबल को 2008 में सीआईएसएफ में नौकरी मिल गई।

यहां पर उसने बतौर महिला CISF कॉन्स्टेबल नौकरी ज्वाइन की, यहां उसे दिल्ली मेट्रो में एंट्री गेट पर महिला पैसेंजर्स को सुरक्षा चेक करने का जिम्मा सौंपा गया। लेकिन अंदर से मर्दों जैसे एहसास रखने वाली इस महिला जवान के लिए लड़कियों और महिलाओं को चेक करना काफी मुश्किल काम था। इस बीच इस महिला कॉन्स्टेबल ने अपनी जिंदगी का एक अहम फैसला लिया और अपना लिंग परिवर्तन करवाकर महिला से पुरुष बनने की तैयारी कर ली।

इसके लिए इस महिला कॉन्स्टेबल ने 10 लाख रुपये का लोन लिया। 2012 में लंबी सर्जरी के बाद इसका ऑपरेशन पूरा हो गया, इस महिला ने अपने डिपार्टमेंट में सेक्स चेंज का आवेदन दिया, लेकिन कानून और ब्यूरोक्रेसी के जाल में उलझी इस महिला की फाइल इधर से उधर भटकती रही और इस पर कोई फैसला नहीं हुआ और विभाग ने इसे पुरुष नहीं माना। इस बीच 2013 में इस CISF कॉन्स्टेबल ने अपनी ही एक महिला साथी से शादी कर ली। इस दौरान उसपर सहयोगी लगातार तंज कसते, पर ये जवान चुप ही रहा।

इसकी महिला जवान की असली परीक्षा तब शुरू हुई जब उसे सेक्स चेंज के बाद खुद को पुरुष साबित करने के लिए कड़े शारीरिक श्रम करने पड़े, और तरह तरह के मेडिकल टेस्ट से होकर गुजरना पड़ा। आखिरकार 4 सालों की कानूनी खींचतान के बाद सीआईएसएफ ने उसे पुरुष कॉन्स्टेबल मान ही लिया है। इस सीआईएसएफ जवान का कहना है कि अगर भारत में गे सेक्स और गे मैरिज कानूनन मान्य होता तो उसे इसे लंबे प्रोसेस से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती।

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