Home > India News > #World Water Day : आदिवासीयो ने बदली गांव की किस्मत की PM मोदी भी कहेगे ‘छा गये गुरु’

#World Water Day : आदिवासीयो ने बदली गांव की किस्मत की PM मोदी भी कहेगे ‘छा गये गुरु’

खंडवा : विश्व जल दिवस यानि पानी को संरक्षित करने का संकल्प लेने ओर धरती से कम हो रहे पानी को बचाने का। वैसे तो हर दिन पानी को सहजकर रखने ओर उसे सोच समझ कर इस्तेमाल करना चाहिए । आज के इस दिन जब हम जल दिवस माना रहे हैं, तो हमे पानी की बढ़ती समस्या को समझना होगा । ऐसी ही समस्या से झुझते मध्य प्रदेश के आदिवासी ब्लॉक खालवा के ग्रांम मामाडोह में रहने वाले आदिवासियों ने पानी की समस्या को दूर कर खुद का वॉटर सप्लाय सिस्टम स्थापित किया। जो अब पुरे क्षेत्र चर्चा का विषय बना हुआ हैं।

मधयपदेश के खंडवा जिले में पड़ने वाले आदिवासी ब्लॉक खालवा तहत आने वाला धावड़ी पंचायत का ग्राम मामाडोह। मामाडोह में रहने वाले आदिवासी पानी की बढ़ती समस्या से इतने परेशान गए थे की उन्हें अपना गांव तक छोड़ना पड़ता था। इतना ही नहीं इन्हें अपने मवेशी भी औने पौने दामों पर बेचने लिए मजबूर होना पड़ता था। ऐसे में मामाडोह के रहने वाले करण सिंह ने अपनी समस्या स्पंदन समाज सेवा समिति के सामने रखी । स्पंदन के प्रभारी सीमा विश्वास ने गांव के लोगों को प्रेरित कर उनके आमने एक प्रस्ताव रखा ।

स्पंदन सेवा समिति की सीमा ने गांव के लोगों से कहा कि गांव के पास में ही एक कुँआ है अगर इसे ही सही कर दिया जाए तो पानी की समस्सया से निजात मिल सकती है। गांव के लोगों ने सीमा के सामने भोजन की समस्या रख दी। जिस पर स्पंदन ने गांव के लोगों के लिए काम के बदले कपड़े और अनाज देने की बात कही। बस यही से गांव में खुशियां लौटना शुरू हुई । ग्रामीणों ने करण सिंह के कुएं से गाद निकल कर उसे फिर से जीवित किया। कुँए में पानी आने के बाद करण सिंह ने ग्राम पंचायत के सहयोग से कुँए में मोटर डाल पूरे गांव में पाइप लाइन बिछा दी । अब गांव के लगभग 80 घरों मे से 50 घर के सामने नल लगे है जिसमे सुबह और शाम 2 से 3 घंटे पानी आता है।

मामाडोह की रहने वाली राधे बाई ने बताया कि पहले उन्हें गांव से दूर लगभग 7 से 8 किलो मीटर पानी लेने जाना पड़ता था । पर अब घर के सामने ही नल लग गया है। यही से पीने और अन्य कामों के लिए पानी पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है। उन्होंने कहा कि अब वे बहुत खुश हैं। अब उन्हें गांव से बाहर नही जाना पड़ता है।

@निशात सिद्दीकी / सुमित दुधे

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