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मोबाइल तो बन जाएगा वॉलेट लेकिन ये हैं साइड इफेक्ट !

cash bankingनई दिल्ली- नोटबंदी के बाद अगर आप भी कैशलेस और डिजिटल बैंकिंग के लिए मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं तो जरा सावधानी बरतिए। पेटीएम और फ्रीचार्ज जैसे कई मोबाइल वॉलेट मार्केट में हैं और काफी दिलचस्प ऑफर के साथ आपको लुभा भी रहे हैं। लेकिन इनके इस्तेमाल के ये साइड इफेक्ट आपके लिए मुश्किल बन सकते हैं।

1. ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं
सबसे बड़ा खतरा आईडेंटिटी चोरी होने का है। डिजिटल ट्रांजेक्शन से ज्यादातर लोग वाकिफ नहीं हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ज्यादा लोगों के आने से ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल हैकिंग का खतरा भी बढ़ सकता है। सरकार की ओर से 2000 रुपये तक के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन प्रॉसेस हटाने का फैसला भी मदद नहीं करेगा। ट्रांजेक्शन के सिक्योरिटी नियमों की पड़ताल में और खामिया मिलेंगी।

2. समस्या सुलझाने का कमजोर सिस्टम
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और अन्य किसी तरह की परेशानी होने पर समस्याओं के निदान की प्रक्रिया काफी धीमी है। अगर पेमेंट के समय किसी का पैसा अटक जाए तो उसके पास ऐसा कोई जरिया नहीं है जहां से वह इसे तुरंत पा सके। ऐसे किसी भी तरह के फ्रॉड से निपटने के लिए कोई कानूनी प्रक्रिया तय नहीं है। गौर करने की बात ये है कि इसके जरिए बैंकिंग सिस्टम और कंपनियों को हैक किया जा सकता है। डाटा बेस चोरी हो सकता है। इसका एक उदाहरण इस साल अक्टूबर में देखा जा चुका है। जब एसबीआई के लाखों ग्राहकों के अकाउंट में सेंध लगी।

3. अगर फोन जाए तब क्या?
आपका मोबाइल फोन ही आपका बटुआ और बैंक भी है। यानी अगर मोबाइल खो जाता है दो आपको दोहरी चपत लगेगी। अगर मोबाइल के सिक्योरिटी फीचर एडवांस और एक्टिव नहीं हैं तो आपका न सिर्फ सारा डाटा चोरी हो सकता है बल्कि वॉलेट में रखा पैसा भी फोन के साथ जाएगा। इसके अलावा एक समस्या यह भी है कि अगर आप विदेश जा रहे हैं या छोटे कस्बों और गांवों में जा रहे हैं तो वहां भी परेशानी झेलनी पड़ेगी क्योंकि वहां भुगतान के ज्यादा विकल्प नहीं मिलेंगे। सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि अगर आपका फोन ऑफ हुआ तो आप बिना पैसों के हो जाएंगे खासकर तब जब आप किसी खरीदारी के बीच में हों या इमरजेंसी के वक्त।

4. तकनीकी की कम समझ रखने वालों के लिए मुश्किल
देश में कुल आबादी का 34.8 फीसदी हिस्सा इंटरनेट इस्तेमाल करता है। कुल 26.3 फीसदी मोबाइल यूजर स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। डिजिटल पेमेंट को अपना बहुत से लोगों के लिए अचानक तीन पीढ़ी आगे कूदना होगा। जो कि उनके लिए आसान नहीं है। तकनीकी से जो लोग वाकिफ नहीं हैं, जो सही ढंग से स्मार्टफोन नहीं इस्तेमाल कर पाते उनके लिए यह मुश्किल बड़ी है। ऐसे लोगों को नए सिस्टम और तकनीक को अपनाने में काफी वक्त लगेगा।

5. ज्यादा खर्च हो जाने की भी संभावना
जेब में पैसे होते हैं तो कोई भी व्यक्ति सोच समझ कर खर्च करता है। जरूरत के हिसाब से कुछ पैसे बचाएगा और कुछ खर्च करेगा। लेकिन डिजिटल बैंकिंग सिस्टम में उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि कब वह लिमिट से ज्यादा पैसे खर्च कर बैठा। ऐसा व्यावहारिक फाइनांस थ्योरी पर काम करने वाले लोग भी मानते हैं। डिजिटल बैंकिंग में मनी कंट्रोल आसान नहीं है जबकि कैश पेमेंट में हर व्यक्ति बटुआ संभालता है। ई-पेमेंट की वजह से ज्यादा खर्च होगा और इसका असर पूरे बजट पर पड़ेगा। [एजेंसी]




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