GST काउंसिल: छोटे करदाताओं व कंपनियों के लिए राहत भरी घोषणाएं, नहीं देनी होगी लेट फीस

जीएसटी काउंसिल की बैठक में आज छोटे करदाताओं व कंपनियों के लिए सरकार ने राहत भरी घोषणाएं की हैं। सबसे खास यह है कि इन्‍हें जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में लगने वाले ब्‍याज पर छूट दी गई है। यह ब्‍याज अब घटाकर आधा कर दिया गया है। इसके अलावा एक और सुविधा दी गई है कि अब जीएसटी रिटर्न जमा करने पर लेट फीस नहीं लगेगी।

कोविड-19 महामारी से पहले तक की अवधि में गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) रिटर्न फाइल नहीं कर पाने वालों को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि जुलाई 2017 से जनवरी 2020 तक की अवधि में जिन्होंने जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं किया है और जिन पर कोई टैक्स बकाया नहीं है, उन्हें अब रिटर्न फाइल करने पर कोई लेट फीस नहीं देनी होगी।

देनी होगी लेट फीस
वहीं, जिन पर इस अवधि के लिए टैक्स बकाया है, उन्हें कम-से-कम 500 रुपये लेट फीस देनी होगी। जुलाई 2017 से जनवरी 2020 तक की अवधि के लिए पेंडिंग जीएसटी रिटर्न अब 1 जुलाई से 30 सितंबर, 2020 के बीच फाइल किया जा सकता है।

9% हुई ब्याज दर
5 करोड़ रुपये के कुल टर्नओवर वाले छोटे करदाता जो फरवरी, मार्च और अप्रैल 2020 के जीएसटी रिटर्न्स 6 जुलाई तक नहीं भरेंगे, उन्हें सालाना 9% ब्याज दर के साथ सितंबर तक रिटर्न भरने की छूट होगी। पहले बकाया टैक्स पर सालाना ब्याज दर 18% तय थी। ऐसे टैक्सपेयर्स को उस हालत में लेट फीस और ब्याज नहीं भरना होगा जो इस वर्ष मई, जून और जुलाई के महीनों में आपूर्ति प्रभावित होने के कारण सितंबर तक जीएसटीआर- 3बी भर देंगे।

काउंसिल ने लिए ये अन्‍य फैसले

– जुलाई 2017 से जनवरी 2020 की अवधि के GSTR-3B के लिए विलंब शुल्क में कमी की गई है। जिन पर किसी तरह की कर जवाबदेही नहीं है, उन्हें किसी तरह का विलंब शुल्क देने की जरूरत नहीं होगी।

– GSTR-3B को लेट से फाइल करने के अधिकतम शुल्क के लिए 500 रुपये की सीमा तय की गई है।

– जुलाई 2017 से लेकर जनवरी 2020 तक के बहुत सी रिटर्न फाइलिंग लंबित है। ऐसे में जिन लोगों की कोई कर जवाबदेही नहीं है लेकिन जिन्होंने रिटर्न नहीं भरा है, उनसे किसी तरह का विलंब शुल्क नहीं लिया जाएगा।

– इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को लेकर किसी भी तरह के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि शुक्रवार की बैठक में जीएसटी दर में कटौती को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।

– पिछले दो महीनों में अन्य महीनों की तुलना में 45 फीसद जीएसटी का संग्रह हुआ।

– कम संग्रह और रिटर्न दाखिल करने की विस्तारित समय सीमा के साथ, सरकार ने अप्रैल और मई के महीनों के लिए मासिक जीएसटी राजस्व संग्रह के आंकड़े जारी नहीं किए हैं। मौजूदा समय में जीएसटी संरचना के तहत, 5, 12, 18 और 28 फीसद स्लैब के तहत कर लगाया जाता है।

मुआवाजे पर चर्चा
सीतारमण ने कहा कि सभी मंत्रियों के आग्रह पर जुलाई महीने में सिर्फ एक अजेंडा- कंपेसेशन सेस पर चर्चा के लिए मीटिंग बुलाई जाएगी। यह राज्यों को दिया जाने वाला कंपेनसेशन है। उन्होंने कहा कि अगर राज्यों को मुआवजा देना पड़ा तो यह किसी ना किसी तरह से कर्ज हो जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि इसे कैसे और कौन चुकाएगा।