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हाशिमपुरा नरसंहार : 42 मुसलमानों की हत्या में पुलिस बरी

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# नई दिल्ली – मेरठ में 1987 के हाशिमपुरा नरसंहार मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपी 16 पुलिसवालों को बरी कर दिया है। इन केस में 19 पुलिसवालों को आरोपी बनाया गया था, जिसमें से तीन की मौत हो चुकी है। 28 साल पुराना यह मामला दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में सबसे पुराना पेंडिंग केस था।

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुए इस कांड में पीएसी पर्सनल ने एक समुदाय के 42 सदस्यों को अवैध रूप से अगवा कर एक साथ मौत के घाट उतार दिया था। अयोध्या में बाबरी मस्जिद विवाद के दौरान यह घटना हुई थी। फरवरी 1986 में राजीव गांधी सरकार के बाबरी मस्जिद का ताला खोलने के फैसले के बाद से उत्तर भारत, खासकर यूपी के कई शहरों में दंगा-फसाद शुरू हो गया था। मेरठ में भी काफी तनाव फैल गया था। हालात पर काबू पाने के लिए पीएसी के जवानों को वहां तैनात किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर साल 2002 में इस केस को गाजियाबाद से दिल्ली में ट्रांसफर किया गया था। अडिशनल सेशन जज संजय जिंदल ने मामले में सभी पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद 21 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। शनिवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए इस मामले के सभी 19 आरोपियों को बरी कर दिया।

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि 22 मई 1987 को कुछ पीएसी पर्सनल (पुलिसवालों) हाशिमपुरा गांव गए और वहां 500 लोगों की सभा में से 50 युवाओं को ट्रक में भरकर गाजियाबाद जिले के मुराद नगर के बाहरी इलाके में ले गए।

वहां पुलिसवालों ने उन्हें एक साथ गोली मार दी और उनके शवों को नहर में डाल दिया। चंद दिनों बाद उनके शव नहर के पानी पर तैरते हुए पाए गए।

मामले में 1996 में गाजियाबाद चीफ जुडिशल मैजिस्ट्रेट के सामने चार्जशीट फाइल की गई थी। इसमें 19 लोगों को आरोपी के तौर पर नामजद किया गया। मई 2000 में 19 में से 16 आरोपियों ने सरेंडर कर दिया जिन्हें बाद में जमानत दे दी गई, जबकि तीन आरोपियों की मौत हो चुकी थी।

पुलिस के मुताबिक इस नरसंहार में 42 लोगों की मौत हो गई थी और पांच लोग जो जिंदा बच गए थे उन्हें साल 2007 में अभियोजन पक्ष का गवाह बना लिया गया। सितंबर 2002 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस को यूपी से यहां दिल्ली में ट्रांसफर किए जाने के बाद अदालत ने साल 2006 में 17 के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, सबूतों से छेड़छाड़ और साजिश के आरोप तय किए। केस की जांच से जुड़ी रही उत्तर प्रदेश की सीबीसीआईडी ने इसमें 161 लोगों को गवाह बनाया था। – एजेंसी 

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