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OMG! यहाँ किराये पर मिलती हैं बीवियां

Europe, Bulgaria, Stara Jagora, bridal market, deal, foreign, news, daughter, mother, father, husband, wifeदेश के कुछ हिस्सों में पत्नियां भी किराये पर मिल रही हैं। मासिक आधार से लेकर सालाना के हिसाब से गरीब घरों की लड़कियों और महिलाओं की शादी उन अमीरजादों से कराई जा रही है, जो अपने लिए पत्नियां नहीं ला सकते हैं। ये कुप्रथा बाते कई सालों से हमारी संस्कृति में घुल मिल गई है और यह चौंकाने वाला है कि अब तक इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।देश के कुछ हिस्सों में पत्नियां भी किराये पर मिल रही हैं। मासिक आधार से लेकर सालाना के हिसाब से गरीब घरों की लड़कियों और महिलाओं की शादी उन अमीरजादों से कराई जा रही है, जो अपने लिए पत्नियां नहीं ला सकते हैं। ये कुप्रथा बाते कई सालों से हमारी संस्कृति में घुल मिल गई है और यह चौंकाने वाला है कि अब तक इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

खराब लिंगानुपात होने के कारण इस कुप्रथा को बढ़ावा मिल रहा है। मध्यप्रदेश राज्य में लिंग अनुपात तेजी से बढ़ रहा है और शिवपुरी इलाके में इसका प्रभाव देखा जा सकता है। यहां इसे दधीच प्रथा के नाम से जाना जाता है। महज 10 रुपए से लेकर 100 रुपए तक की डीड पर हस्ताक्षर के बाद महिला का पति बदल जाता है। सौदे का समय पूरा होने के बाद महिला को दूसरे व्यक्ति को बेच दिया जाता है।
इस कुप्रथा के बढ़ने के लिए महिलाएं भी समान रूप से जिम्मेदार हैं। इस तरह की घटनाएं कई बार पुलिस के सामने हुई हैं, लेकिन जब तक महिलाएं ही इन अन्यायों के बारे में बात नहीं करना चाहती और सामने आना चाहती हैं, तो कैसे कार्रवाई हो सकती है। मामला केवल एमपी तक ही सीमित नहीं है। अन्य राज्य भी इसमें शामिल हैं।

साल 2006 में भरुच में नेत्रगंज तालुका में एक मामला दर्ज किया गया था। अता प्रजापति नाम का एक व्यक्ति अपनी पत्नी लक्ष्मी को मेहसाणा में एक पटेल के साथ रहने के लिए भेज दिया था, जिसके लिए उसे 8,000 रुपए महीना किराया मिल रहा था। लड़कियों की कमी ने एजेंट्स और बिचौलियों को प्रेरित किया है कि वे गरीब परिवारों की लड़कियों को इस काम में लगाएं।

मेहसाना, पाटण, राजकोट और गांधीनगर जैसे जिलों में महिलाओं की कमी ने एजेंटों और गरीब परिवारों को पैसे कमाने के इस जरिया दिया है। दलाल 65-70 हजार रुपए लेते हैं और गरीब आदिवासी परिवारों को उनकी बेटियों के लिए 15 से 20 हजार रुपए देते हैं।
आदिवासी युवा महिलाओं को 500 रुपए से लेकर 60,000 रुपए तक में किराये पर मुहैया कराया जाता है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि युवा महिला का परिवार कितना गरीब है और उसे पैसों की कितनी जरूरत है। वहीं, एक दलाल ने कहा कि 1.5 लाख रुपए से लेकर 2 लाख रुपए प्रति माह कमाते हैं।

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