लखनऊ : जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली सुधा सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार का 30 लाख का ईनाम लेने से इनकार कर दिया। सुधा ने कहा कि जब तक उन्हें नौकरी कि उन्हें नौकरी का वादा नहीं किया जाता, वो ये ईनाम नहीं लेंगी। पदक विजेता ने मंगलवार को लखनऊ में हुए एक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने ये बातें कहीं। हालांकि उन्होंने बाद में ये कैश प्राइज स्वीकार कर लिया।

लखनऊ में मंगलवार को खिलाड़ियों के लिए आयोजित सम्मान समारोह में एशियन गेम्स पदक विजेता सुधा सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 30 लाख का कैश प्राइज लेने से मना कर दिया। कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और राज्यपाल राम नाइक खेल विभाग की तरफ से खिलाड़ियों को सम्मानित कर रहे थे। जब सुधा को 30 लाख का कैश प्राइज दिया गया, तो उन्होंने ये लेने से इनकार कर दिया।

सुधा सरकार से उन्हें उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय में डिप्टी डायरेक्टर का पद देने से इनकार करने पर नाराज थीं। कार्यक्रम में जब सुधा ने कैश प्राइज के चेक को मना किया, तो वहां सन्नाटा छा गया। ईनाम को विनम्रता से मना करते हुए सुधा ने सीएम और राज्यपाल से कहा, ‘मुझे नौकरी चाहिए, पैसा नहीं। इन पैसों को राज्य के युवा खिलाड़ियों को दे दीजिए, लेकिन मुझे एक नौकरी दे दीजिए।’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा नौकरी का वादा करने के बाद ही सुधा ने कैश प्राइज स्वीकार किया।

सुधा ने कहा कि अगर उन्हें खेल में डिप्टी डायरेक्टर की नौकरी नहीं मिलती है, तो वो अपना कैश प्राइज वापस लौटा देंगी और हमेशा के लिए राज्य छोड़कर चली जाएंगी। सुधा ने गुआंगज़ौ में 2010 में हुए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल और 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता है। उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित क्या गया था। उनके नाम 6 अंतरराष्ट्रीय पदक है। सुधा सिंह ने कहा कि खेल निदेशालय में लोग खुद को उनकी उपलब्धियों से तुलना करें। अगर वो उन्हें गलत साबित करते हैं तो सुधा नौकरी के लिए अनुरोध नहीं करेंगी।