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भावांतर भुगतान योजना : इस वजह से बढ़ी सरकार की चिंता

भोपाल : मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में कम पंजीयन ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। दरअसर, सरकार इस योजना को कर्जमाफी के तोड़ के रूप में प्रस्तुत कर रही है। पंजीयन बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को खुद मोर्चा संभाल लिया।

रेडियो और टीवी के माध्यम से उन्होंने विशेष ग्रामसभा लगवाकर किसानों से सीधी बात की। मुख्यमंत्री ने योजना को महाबोनस करार देते हुए कहा कि इससे उचित दाम की गारंटी मिलेगी। किसानों को पंजीयन कराने की हिदायत देते हुए वे बोले कि इसके बिना योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

प्रदेश की 23 हजार पंचायतों में विशेष ग्रामसभा लगवाकर किसानों से भावांतर भुगतान योजना में पंजीयन के लिए आवेदन भरवाए गए। अभी तक सिर्फ साढ़े आठ लाख किसानों ने पंजीयन कराया है, जबकि उम्मीद 15 लाख से ज्यादा किसानों के योजना से जुड़ने की थी। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष ग्रामसभाएं बुलवाईं और खुद किसानों को भोपाल से संबोधित किया।

इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार किसान के साथ है। बाजार में जब भाव कम हुए तो सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर प्याज और फिर मूंग, उड़द और तुअर खरीदी। भावांतर योजना में आठ फसलों की खरीदी 16 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य और मॉडल रेट के बीच जो अंतर आएगा, उसका भुगतान सरकार करेगी।

प्रदेश सरकार भावांतर भुगतान योजना के प्रचार-प्रचार के लिए प्रदेश की 257 कृषि मंडियों में किसान सम्मेलन करेगी। इस पर करीब चार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मंडी बोर्ड ने यह राशि समितियों के लिए मंजूर कर दी है।

योजना में सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग और उड़द की खरीदी होगी। इन फसलों की खरीदी 16 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलेगी। फरवरी में तुअर भी भावांतर योजना के तहत खरीदी जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि योजना के तहत खरीदी गई उपज के भाव अंतर का भुगतान करीब दो माह बाद किसान को किया जाएगा। 15 दिसंबर को जब खरीदी बंद हो जाएगी, उसके बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी। भुगतान सिर्फ पंजीयन के वक्त बताए गए बैंक खातों में होगा।

प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि योजना में वह खरीदी ही मान्य होगा, जो लायसेंसी व्यापारियों द्वारा मंडियों में की जाएगी। पक्की पर्ची पर हुई खरीदी को ही मान्यता मिलेगी। इसके आधार पर ही किसान को भावांतर भुगतान योजना में अंतर की राशि दी जाएगी।

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