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जयंती पर विशेष : मूर्ति पूजा के विरोधी थे गुरु नानक देव

nankana_sahibअव्वल अल्लाह नूर उपाया, कुदरत दे सब बन्दे,.
एक नूर ते सब जग उपज्या कौन भले कौ मंदे ||

भारतीय संस्कृति में गुरु विशेष महत्त्व है। सिक्खों के पहले गुरु नानक देव का जन्म रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गाँव में कार्तिकी पूर्णिमा को एक खत्रीकुल में सन 1469 पंजाब में हुआ था । इस वक्त यह जगह पाकिस्तान में आती है। इनके पिता का नाम कल्यानचंद और माता का नाम तृप्ता था। ये बचपन से ही तेज बुद्धी के थे। आज 2016 में उनका 547वां जन्मदिन है।

नानक का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था। उन्होंने इस्लाम की भी पढ़ाई की थी। हालांकि उन्होंने दोनों ही धर्मों की आलोचना की। दोनों धर्मों में होने वाले तीर्थस्थल की यात्रा, मु्क्ति का मार्ग, जन्म और मरण का चक्र जैसी बातों का विरोध किया। इसके इतर वो भगवान के साथ रूहानी रिश्ते में विश्वास करते हैं। 30 की उम्र में शादी और बच्चे होने के बावजूद गुरु नानक दक्षिण एशिया, तिब्बत और अरब की स्प्रिचुअल जर्नी के लिए निकल पड़े थे जो 30 सालों तक जारी रही। उन्होंने अपने हिंदू और इस्लाम धर्म और जातिवाद के बारे में विरोध को लेकर बातें कीं। उनका मानना था कि भगवान तक हर कोई बिना किसी छुआछूत और भेदभाव के पहुंच सकता है। इसी से सिख धर्म का जन्म हुआ और वो इसके पहले गुरु बन गए। सिखों के दस गुरु हैं और उसके बाद गुरुग्रंथ को उन्होंने अपना 11वां गुरु मान लिया।

गुरुनानक का असल में 15 अप्रैल को जन्म हुआ था। हालांकि उनका जन्मदिन हिंदू कैलेंडर के हिसाब से नवंबर में मनाया जाता है। इसकी कोई निर्धारित तिथि नहीं है लेकिन कार्तिक महीने के पहले पूरे चांद वाले दिन इसे सेलिब्रेट किया जाता है।

गुरुनानक के जन्मदिन से पहले ही पूरे देश और विदेश में प्रकाश पर्व की धूम शुरू हो जाती है। इस दौरान पुरुष गतका के रूप में सिख मार्शल आर्ट को परफॉर्म करते हुए भजन गाते हैं। सिख समुदाय के लोग सुबह के 4-5 बजे से ही इसे भजन गाकर प्रकाश पर्व मनाना शुरू कर देते हैं। इस दौरान सामुदायिक भोज लंगर सभी को खिलाया जाता है। इस दिन देर रात तक प्रर्थना होती है। कुछ सिख इस दिन पाकिस्तान में गुरुनानक की जन्मस्थली के दर्शन भी करते हैं। इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव की वजह से ऐसा होने के आसार कम हैं। हालांकि पाकिस्तानी उच्चायोग ने बताया था कि उन्होंने 3316 सिख श्रद्धालुओं को वीजा दिया है।

नानक मूर्ति पूजा के हमेशा से विरोध में रहे। उन्होंने मूर्ति पूजा को निरर्थक माना। उनके अनुसार ईश्वर की प्राप्ति केवल आंतरिक साधना से संभव है। गुरुद्वारा जन्म स्थान सिक्ख धर्म का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है। इसे राजा रंजीत सिंह ने बनवाया था। इसे ‘ननकाना साहब’ के नाम से भी जाना जाता है। वैसे अब ये गुरुद्वारा लाहौर, पाकिस्तान में आता है।

नानक जी ने दस सिद्धांत दिए हैं
1.ईश्वर एक है।
2.सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो।
3.ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नही रहता
4.ईश्वर सब जगह मौजूद है।
5. बुरा काम करने के बारे में ना सोचे और ना कभी किसी को सताए।
6.हमेशा खुश रहना चाहिए। ईश्वर से सदा अपने को क्षमाशीलता और धेर्य मांगना चाहिए।
7. मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके उसमें से जरूरतमंद को भी देना चाहिए।
8. सभी लोग बराबर हैं।
9. लोभ और लालच नहीं करना चाहिए।
10.ईमानदारी से जीवन यापन करना चाहिए।





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