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चौपाल लगाकर दे रहे ग्रामीणों को कैशलेस ट्रांजेक्शन का प्रशिक्षण

cash bankingआगर मालवा- नोटबंदी के बाद कैशलेस व्यवस्था के तमाम दावो के बीच ग्रामीणों में नेट बैंकिंग और कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए जागरूकता के लिए आगर मालवा जिले में बैंको के अधिकारी गाँव में चौपाल लगा रहे है । बैंक ऑफ़ इंडिया के चिल्लर एप को गाँव पहुंचाने में अमल जुट गया है ।

कैशलेस योजना को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का झटका

इस सर्द मौसम में ठिठुरन से बचने के लिए धुप में बैठे लोगो के बीच बैंक ऑफ़ इंडिया के मैनेजर अपने महकमे के साथ कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने की कवायद में लगे । नेट बैंकिंग , ATM और स्वाइप मशीन का इस्तेमाल कैसे करना है, इसके फायदे क्या है और देश में चल रहे नगदी संकट से उबरने में ये कैसे कारगर है। इन्ही सब सवालो के साथ समाधान का डेमो भी लोगो के बीच हो रहा है । ऐसी तस्वीरें आगर मालवा जिले के पालखेड़ी गाँव के साथ ही जिले गाँव गाँव में आम है ।

यह है देश का पहला कैशलेस गांव

करीब आठ सौ की आबादी वाले इस गाँव में छह सौ से ज्यादा बैंक खाताधारियों के पास ATM कार्ड है । ऐसे में आम जरूरतों के लिए होने वाले लेनदेन को कैशलेस बनाने के लिए बैंक ऑफ़ इंडिया के चिल्लर एप , स्वाइप मशीन और नेट बैंकिंग के जरिये करने की हिदायत और प्रशिक्षण दिए जा रहे है । उम्मीद है कि ये कवायदे असर करेगी और नगदी संकट से पार पाना आसान होगा ।

कैशलेस अर्थव्यवस्था अच्छे दिन से बडा सपना

गाँव की महिलाएं इस कोशिश में सहभागी बन रही है और उनका उत्साह चरम पर है, माना जा रहा है कि कैशलेस व्यवस्था से समय बचेगा और साथ में सुविधाजनक भी रहेगा ।

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नोटबंदी की घोषणा को पचास दिनों की अवधि पूरी हो गई इस दरमियान अमूमन हर दूसरे तीसरे दिन नए नए नियम कायदे आते रहे और आम लोगो की सहुलायतो के दावे भी किये जाते रहे । लेकिन सरकार के दावे और जमीनी हकीकत के बीच की खाई कम होने के बजाए बढ़ती ही जा रही है । ऐसे में गाँवों में कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने की ये एक और कोशिश कितनी कारगर होती है ये आने वाला वक़्त ही बताएगा ।
रिपोर्ट- @जफ़र मुलतानी




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