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CM शिवराज की खतरे में जान, पत्नी संग करना होगा ये

भोपाल : व्यापम घोटाला मामले में मुख्यमंत्री के बचाव में उतरे मध्यप्रदेश सरकार के तीन मंत्रियों द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो को ज्ञापन सौंपकर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह पर आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की मांग के अगले दिन शुक्रवार को कांग्रेस ने बड़ा हमला बोलते हुए व्यापम घोटाले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी पत्नी व अन्य का नार्केा टेस्ट की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा, “व्यापम घोटाले में मुख्यमंत्री शिवराज कभी ‘क्लीन’ नहीं हो सकते, क्योंकि चारा घोटाले से भी बड़ा व्यापम महाघोटाला उनके कार्यकाल की देन है, जिसमें प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में चला गया। इस मामले से जुड़े 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस जघन्य अपराध के दोषी मुख्यमंत्री हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सीबीआई अगर वाकई सच्चाई सामने लाना चाहती है तो उसे मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी, जेल से छूटे पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, अजय मेहता, गुलाब सिंह किरार, नितिन महिंद्रा और मुख्यमंत्री के पीए प्रेम सिंह का नार्को टेस्ट कराना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री व्यापम घोटाले से सुनियोजित तरीके से मुक्त होने के लिए छटपटा रहे हैं। मुख्यमंत्री के तीन किचन कैबिनेट मंत्रियों का सीबीआई के पास जाना साबित करता है कि इस घोटाले को लेकर उनमें अंदर से कितनी दहशत है।

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किया, “मुख्यमंत्री बताएं कि क्या कैग द्वारा कही गई यह बात झूठी है कि सरकार ने व्यापम के दस्तावेज देने से मना किया, क्या उनके मंत्रिमंडल के सदस्य रहे लक्ष्मीकांत शर्मा जेल नहीं गए? क्या चिकित्सा शिक्षा का प्रभार मुख्यमंत्री के पास नहीं था? क्या उन्होंने स्वयं विधानसभा में 1000 प्रकरणों में गड़बड़ी होना स्वीकार नहीं किया? क्या इस मामले में आज भी सैकड़ों लोग जेल में नहीं हैं?”

अजय सिंह ने कहा कि व्यापम घोटाले के जन्म से लेकर उसके उजागर होने तक शिवराज सिंह चौहान ही मुख्यमंत्री रहे हैं। जब इस दौरान की सभी उपलब्धियां उनके खाते में है, तो व्यापम घोटाले की कालिख से वे कैसे बच सकते हैं?

नेता प्रतिपक्ष ने सीबीआई पर सरकार के इशारों पर चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह व्यापम घोटाले का उनके दोषियों की गहराई से पड़ताल करना छोड़ मुख्यमंत्री चौहान को क्लीनचिट दिलाने में जुटी है।

ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश सरकार के तीन मंत्रियों- डॉ. नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह और विश्वास सारंग ने गुरुवार को व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) घोटाला मामले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह व अन्य पर कूटरचित दस्तावेजों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि मलिन करने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने सीबीआई के पुलिस उप महानिरीक्षक (व्यापम प्रकरण) को ज्ञापन सौंपा था।

तीनों मंत्रियों ने सीबीआई को ज्ञापन देकर कूटरचित साक्ष्य पेश करने, अकारण मुख्यमंत्री चौहान की छवि को मलिन करने के प्रयास किए जाने पर दिग्विजय सिंह, प्रशांत पांडे और डॉ. आनंद राय के विरुद्ध धारा 120बी भादवि, धारा 182, धारा 192, धारा 195, धारा 211, धारा 465, धारा 468, 469, 471, 472 ओर धारा 474 भारतीय दंड विधान संहिता के अंतर्गत प्रमाण दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।

व्यापमं घोटाले के उजागर होने के बाद एसटीएफ और एसआईटी ने 55 मामले दर्ज किए थे, जिसमें 2500 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया था, इनमें से 21 सौ से ज्यादा को गिरफ्तार किया गया। वहीं चार सौ से ज्यादा अब भी फरार हैं।

इतना ही नहीं, व्यापम मामले से जुड़े 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस घोटाले में पकड़े गए पूर्व मंत्री से लेकर तमाम प्रभावशाली लोग इन दिनों जमानत पर जेल से बाहर हैं।

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