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कंप्यूटर बाबा ने खोले शिवराज सरकार के राज

 


खंडवा : प्रदेश की राजनीति में अपनी ताल ठोक चुके कंप्यूटर बाबा ने अब शिवराज के राज खोलना शुरू कर दिया हैं।

बाबा ने शिवराज पर निशाना साधते हुआ कहा की नर्मदा में हो रहे अवैध उत्खनन पर जब हमने रोक लगाने की बात कही तो शिवराज ने चुनाव का हवाला देकर हमें चुप करने की कोशिश की।

बाबा ने आरोप लगाया की शिवराज और शिवराज की पूरी सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। न तो वो गौ की सेवा कर पा रहे हैं और ना ही नर्मदा में हो रहे अवैध उत्खनन। इस लिए हम सरकार से अलग हो गए।

कंप्यूटर बाबा ने कहा कि सभी संतो के साथ मिलकर अब वे शिवराज सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर कर उनकी पोल खोलेंगे।

बाबा ने शिवराज सरकार को धर्म विरोधी सरकार तक कह दिया। कंप्यूटर बाबा खंडवा में होने वाले संत समागम के लिए यहाँ पहुंचे हैं। यहाँ सभी संत अपने मन की बात करेंगे। संत समागम के लिए खंडवा पहुंचे कंप्यूटर बाबा ने शिवराज सरकार पर जम कर निशाना साधा।

बाबा ने आरोप लगाया की अवैध उत्खनन ने शिवराज के परिवार का हाथ हैं।बाबा ने कहा कि जब हमने घोटाला यात्रा निकली तो शिवराज ने हमें कहा कि महाराज आप ही नर्मदा को अवैध उत्खनन से बचाए।

उन्होंने हमसे कहा की आप सरकार में आकर गौ की रक्षा करें नर्मदा को बचाए। इस बात पर हम शिवराज सरकार के साथ हो गए किंतु शिवराज ने 6 महीने लगातार हमें घुमाया। जब हमने उनसे कहा की लोग कह रहे है कि आप का परिवार ही अवैध उत्खनन रहा है।

अब तो बंद करा दो आप हमें कोई सरकारी कर्मचारी नहीं दे रहे हो तो हमारे संत समाज के एक हजार आदमी रात में हो रहे अवैध उत्खनन को रोकेंगे तो शिवराज ने कहा की नहीं बाबा जी ऐसा मत करना चुनाव का समय हैं नहीं तो चुनाव में सब गड़बड़ हो जायेगा। जब हमने कहा की ये तो धर्म विरोधी सरकार हैं जिसकी धर्म में कोई आस्था ही नहीं हैं। इस लिए हमने इस्तीफा दे दिया।

इतना ही नहीं बाबा कहा कि संत समाज नर्मदा में हो रहे अवैध उत्खनन को लेकर बहुत दुःखी हैं। अब संत समाज सरकार के खिलाफ अपने मन की बात करने के लिए संत समागम कर रहा हैं। जब उनसे पूछा गया की क्या ये काम सरकार पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है तो उन्होंने कहा कि सरकार पर दबाव नहीं बल्कि सरकार को आईना दिखने का काम हैं।

वे यही नहीं रुके उन्होंने कहा कि हमने शिवराज से कहा की आप इतनी पंचायतें बुलाते हैं एक पंचायत संत समाज की भी बुला लीजिए पर शिवराज ने संतों से मिलना उचित नहीं समझा इसलिए अब संत खुद ही समागम कर के अपने मन की बात करेंगे।

देखने वाली बात है कि अब संत समाज इस चुनावी महाभारत में धर्म की रक्षा के लिए क्या कदम उठता है। क्या वाकई सभी संत समाज कंप्यूटर बाबा के साथ आता हैं या फिर किसी राजनीतिक दल की ओठ में अपना डेरा जमता हैं।

रिपोर्ट @जमील चौहान

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