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समारोह के रूप में मना राजा शाह का बलिदान दिवस

mandla-raja-shah-dayमंडला – गढ़ा मंडला के गोंड राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुंवर रघुनाथ शाह का बलिदान दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। राज राजेश्वरी मंदिर के ऐतिहासिक प्रांगण में पुलिस के सशस्त्र जवान व एनसीसी कैडिट्स ने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानी राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को सलामी दी।

राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह को अंग्रेजो ने एक गद्दार की सूचना पर उस वक़्त गिरफ्तार कर लिया था जब वो अंग्रेजी हुकूमत के ख़िलाफ़ विद्रोह की योजना बना रहे थे। इसी जुर्म में दोनों गोंड राजाओं को जबलपुर में अंग्रेजो ने टॉप के मुह में बांधकर गोले से उड़ा दिया था। उनके इसी महान बलिदान को हर वर्ष मंडला के ऐतिहासिक राज राजेस्वरी वार्ड स्थित उनके जन्म स्थान में याद किया जाता है। इस मौके पर राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को श्रद्धा सुमन अर्पित करने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते उपस्थित थे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों एवं गणमान्य नागरिकों ने शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रंद्धाजलि दी। जिला प्रशासन के पुलिस बल द्वारा बलिदानियों को सलामी दी गई। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न लोक नर्तक दल  द्वारा आदिवासी लोक नृत्य और कला पथक दल द्वारा गोड़ राजाओं की वीरगाथा से ओतप्रोत लोकगीत प्रस्तुत किये गये।

मंडला के ऐतिहासिक राज राजेस्वरी वार्ड में गोंड राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुंवर रघुनाथ शाह का बलिदान दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। पुलिस के सशस्त्र जवान व एनसीसी कैडिट्स ने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानी राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को सलामी दी। 1857 की क्रांति में मंडला के आदिवासियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। अपने क्षेत्र के लोगों में आजादी और राष्ट्रीयता की भावना को पैदा करने के लिये यहाँ के राजा शंकर शाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। अंतिम गोंड शासक शंकर शाह और रघुनाथ शाह को अंग्रेजी हुकूमत ने जबलपुर में तोप के मुंह से बाँधकर गोले से उड़ा दिया था। इनके इसी महान बलिदान को हर साल उनकी जन्म स्थली में मनाया जाता है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी।

ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने की मांग –
गौंडी पब्लिक ट्रस्ट के संरक्षक और वयोवृद्ध इतिहासकार गिरिजा शंकर अग्रवाल ने गौंड राजाओं के इतिहास की जानकारी देते हुए शंकर शाह और रघुनाथ शाह की जन्म स्थली किला मंडला होना बताई तथा बताया कि विद्रोह के दौरान उन्हें 14 से 16 सितम्बर 1857 तक जबलपुर की एक काल कोठरी में कैद कर रखा गया तथा वर्तमान एल्गिन अस्पताल के सामने तोप के मुंह में बांध कर मार डाला गया। उन्होंने कहा कि इन स्थलों को संरक्षित करने केन्द्रीय पुरातत्व विभाग को प्रस्ताव भेजे गये हैं। उन्होंने इन ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने की मांग रखी।

कुलस्ते ने छेड़ा गोंडवाना राज्य का शिगूफा –
इस अवसर पर संबोधित करते हुये सांसद श्री कुलस्ते ने कहा कि इन बलिदानियों ने अपने शौर्य एवं प्राणों की आहुति दी इनके बलिदान के कारण हम स्वाभिमान से खडे हैं। उन्होंने गौड़ साम्राज्य के इतिहास में और अधिक शोध की आवश्यकता बताई। श्री कुलस्ते ने कहा कि यह परम्परा लगातार चलनी चाहिये ताकि आगे की पीढ़ी जिले के इतिहास को समझ सके। समारोह को सम्भोदित करते हुए कुलस्ते ने गोंडवाना राज्य का शिगूफा छेड़ दिया। उन्होंने कहा कि विदर्भ के लोग चाहते हैं विदर्भ और गोंडवाना लैंड को लेकर बने अलग गोंडवाना राज्य बनना  चाहिए। समारोह के बाद जब मीडिया ने गोंडवाना राज्य के बारे में उनसे पूंछा तो उन्होंने कहा कि नागपुर यात्रा के दौरान वहां के लोगों ने जो बात कही मैंने केवल उनकी भावनायें प्रकट की है।

कुचरा बैल से की डॉक्टर्स की तुलना –
मीडिया से बात करते हुए कुलस्ते ने कुचरा बैल से की डाक्टरों की तुलना का नए विवाद को जन्म दे दिया है। कुलस्ते एमबीबीएस डिग्री धारकों के लिए नया कानून बनाने की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नए डॉक्टर्स को अब अनिवार्य रूप से दो साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में काम करना होगा। जब उनसे पूंछ गया कि वर्तमान डॉक्टर्स को ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने क्यों नहीं भेजा जाता तो उन्होंने कहा कि जो चीज़ हाथ से निकल गई उस पर कुछ नहीं किया जा सकता। जिस तरह कुचरा बैल को कितना ही लकड़ी कोंची जाये लेकिन उसकी मर्जी के खिलाफ उसे चलाया नहीं जा सकता उसी तरह डाक्टरों को उनकी मर्जी के खिलाफ काम के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं भेजा जा सकता। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक केवल देश के 40 प्रतिशत लोगों तक ही स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंची जिसके विस्तार के लिए वो लगातार प्रयास कर रहे है।

करना पड़ सकता है डॉक्टर्स के विरोध का सामना –
डॉक्टर्स को लेकर केंद्रीय स्वास्थ राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते का यह ब्यान उनकी परेशानी का सबब बन सकता है। इसके लिए उन्हें डॉक्टर्स की नाराज़गी का सामना भी कर पड सकता है। वैसे भी उनका यह बयान उस वक़्त आया जब एक दिन पहले ही उनके सिनियर और केंद्रीय स्वास्थ मंत्री जे पी नड्डा को भोपाल में एम्स के छात्रों की नाराज़गी झेलनी पड़ी थी। नाराज़ छात्रों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पर स्याही फेंक दी थी। अब यह देखना होगा की चिकित्सक फगगगन सिंह कुलस्ते के इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते है।

बलिदानियों से सीख लेने की नसीहत –
इस अवसर पर जिला पंचायत के उपाध्यक्ष शैलेष मिश्रा ने कहा कि युवा पीढ़ी को इन बलिदानियों के इतिहास एवं उनके राष्ट्र प्रेम से जुडी जानकारियां अध्ययन काल से ही होनी चाहिए इसके लिए उन्हे पाठ्यक्रमों में शामिल किये जाने का प्रयास होना चाहिए। स्वतंत्रता के बलिदानियों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व से सीख लेना और देश के लिए अपनी क्षमता के अनुसार योगदान करना ही इनके प्रति सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।

राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह मेडिकल कॉलेज की मांग –
नगर पालिका अध्यक्ष अनिल बाबा मिश्रा ने कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने सिर्फ गौंड वंश ही नही बल्कि सभी वर्ग के लोगों को जोड़कर आजादी की लड़ाई का बिगुल फूंका था और इन्ही बलिदानियों के त्याग के कारण देश स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि सभ्य और गतिशील राष्ट्र की परिकल्पना के लिए ऐसे बलिदानियों की स्मृति में विभिन्न आयोजन कर युवा पीढ़ी को देशभक्ति की दिशा दी जा सकती है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मण्डला में राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह मेडिकल कॉलेज की मांग रखी। इस अवसर पर रतन ठाकुर ने गोंड राज्य और उसके पराक्रम की गाथा ब्यान की।
रिपोर्ट- @सैय्यद जावेद अली




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