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नई दिल्ली– दिल्ली के राजेंद्र नगर में मनोज वशिष्ठ एनकाउंटर के विरोध में बागपत के गांव पाबला के लोगों ने दिन में जिला मुख्यालय पर जुलूस निकाला और हाईवे के राष्ट्रवंदना चौक पर जाम लगाया। गुस्साए लोगों ने दिल्ली पुलिस का पुतला भी फूंका। लोग टीम में शामिल दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग कर रहे थे। आज चौथे दिन भी गांव का माहौल बेहद गमगीन है। टटीरी के व्यापारियों ने विरोध स्वरूप बाजार भी बंद रखा।

वहीं, मनोज वशिष्ठ एनकाउंटर केस में शामिल सभी पुलिसकर्मियों का तबादला कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के पीआरओ राजन भगत ने बताया कि मृतक के परिजनों ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त से मुलाकात की। भगत के अनुसार इस दौरान उन्होंने मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों को उनके पद से हटाने की मांग की, जिससे वे जांच पर असर न डाल पाए। इसके साथ ही कुछ अन्य आरोप भी लगाए, जिसकी विजिलेंस जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

इससे पहले दिल्ली के राजेंद्र नगर इलाके के सागर रत्ना रेस्टोरेंट में शनिवार रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के द्वारा कथित एनकाउंटर में मारे गए मनोज वशिष्ठ के मामले में नया मोड़ आ गया है। सोमवार को जारी एक सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि मनोज अपने पांच अन्य साथियों के साथ टेबल पर बैठा है। इन पांच लोगों में तीन पुरुष और दो महिलाएं थीं।

स्पेशल सेल के नौ लोग रेस्टोरेंट में दाखिल होते हैं और मनोज वशिष्ठ को घेर लेते हैं। एक पुलिसकर्मी द्वारा मनोज के कंधे पर हाथ रखते ही वह भागने की कोशिश करने लगता है। लेकिन स्पेशल सेल के लोग उस पर झपट पड़ते हैं। हाथापाई के दौरान मनोज पर गोली चलती है और वह वहीं ढेर हो जाता है।

दो मिनट 53 सेकंड के इस वीडियो फुटेज को मनोज की पत्नी प्रियंका वशिष्ठ ने फर्जी बताया है। उसका कहना है कि यदि मनोज भागने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें पैर में गोली क्यों नहीं मारी, सिर में गोली क्यों मारी गई। उन्होंने कहा कि यह सुपारी किलिंग है। उनका कहना है कि मनोज कोई आतंकी नहीं थे। कुछ आर्थिक लेन-देन के विवाद को दिल्ली पुलिस तूल देकर मनोज को बड़ा अपराधी साबित करने का षडयंत्र रच रही है। एजेंसी

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