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नसीरुद्दीन शाह ने कहा- ये देश मेरी मातृभूमि है, मैं कोई देशद्रोही नहीं हूं

मुंबई: हिंदी सिनेमा के प्रख्यात अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को उस वक्त लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा जिस वक्त उन्होंने कहा कि उन्हें इस देश में अब डर लगने लगा है, समाज में जहर घुल गया है, लोगों ने शाह को उनके इस बयान के लिए ट्रोल भी किया, लोगों ने उनके खिलाफ बयानबाजी करते हुए लिखा कि नसीर साहब राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। जब 26/11 का हमला हुआ तब इन्हें डर नहीं लगा, आज क्यों डर लग रहा है, तमाम तरह के सवालों में घिरे नसीरूद्दीन शाह अजमेर लिटरेचर फेस्टिवल में विरोध के चलते वे हिस्सा भी नहीं ले पाए।

अब उन्होंने एक वीडियो के जरिए अपनी किताब लॉन्च करने के साथ ही बयान को समझाने की कोशिश की है, रविवार को अजमेर लिटरेचर फेस्टिवल में एक वीडियो मैसेज के जरिए नसीर की किताब ‘नजीर फिर एक दिन’ रिलीज हुई, उन्होंने इस दौरान अपने बयान पर सफाई दी कि ये देश मेरा भी है और इसके लिए मुझे शोर मचाने की जरूरत नहीं, मैंने सिर्फ घटनाक्रम पर अपने विचार लोगों के सामने रखे थे, जिसे दूसरी दिशा में मोड़ दिया गया।

नसीर ने कहा कि ये देश मेरी मातृभूमि है, मैं देशद्रोही नहीं हूं, मुझे देश की आलोचना करना दुख भरा लगता है मगर अगर मुझे कुछ गलत लगेगा तो मैं इसके बारे में जरूर बोलूंगा, मैं देश के भविष्य को लेकर फिक्रमंद हूं, मेरी 4 पुरखें इस देश में जन्मीं हैं, मेरा जन्म यहां हुआ है, मेरे बच्चे यहां रहेंगें, मैं इस देश से बहुत प्यार करता हूं और मुझे इसका शोर मचाने की जरूरत नहीं है।

मालूम हो कि के दिग्गज अभिनेताओं में से एक माने जाने वाले नसीरुद्दीन शाह ने बुलंदशहर हिंसा पर एक विवादित बयान दिया है, उन्होंने कहा कि आज देश की स्थिति काफी खराब हो गई है, इस वक्त पूरे समाज में जहर फैल चुका है। आज गाय की जान इंसान से ज्यादा कीमती है। उन्होंने कहा कि आज कानून हाथ में लेने की खुली छूट है। कोई कहीं भी, कभी भी, किसी को भी, मार देता है और कोई कुछ नहीं करता है। उन्होंने कहा कि मुझे डर नहीं लगता लेकिन देश के हालात से मुझे गुस्सा आता है, अपने बच्चों के लिए फिक्र होती है।

एक वेबसाइट से बातचीत करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि हमने बुलंदशहर हिंसा में देखा कि आज देश में एक गाय की मौत की अहमियत पुलिस ऑफिसर की जान से ज़्यादा होती है, मुझे इस बात से डर लगता है कि अगर कही मेरे बच्चों को भीड़ ने घेर लिया और उनसे पूछा जाए कि तुम हिंदू हो या मुसलमान? मेरे बच्चों के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा और उसके बाद भीड़ कुछ भी कर सकती है और हम में से कोई कुछ नहीं कर पाएगा।

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