TMC विधायक की हत्या मामले में भाजपा नेता मुकुल रॉय के खिलाफ FIR दर्ज

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पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कृष्णागंज विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के विधायक सत्यजीत विश्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस एफआईआर में मुकुल रॉय का नाम भी शामिल है। इसके साथ ही हंसखली पुलिस थाने के प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है।

विश्वास को शनिवार की रात को गोली मारी गई थी। यह घटना तब घटी जब वह शनिवार की रात को अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित धार्मिक समारोह में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे।

सरस्वती पूजा के कार्यक्रम में मंच से उतरने के बाद हमलावरों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थी। उन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस के अनुसार हमलावरों ने उनपर प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली चलाई थी। घटना के बाद इलाके में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिसबलों की तैनाती की गई है। विश्वास की कुछ दिनों पहले ही शादी हुई थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, वह मृदुभाषी और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। टीएमसी ने पुलिस से मामले में तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा है।

विधायक की हत्या के बाद से तृणमूल भाजपा को लेकर आक्रामक हो गई है। पार्टी का कहना है कि इस घटना के पीछे भाजपा का हाथ है।

तृणमूल नेता शंकर दत्ता का आरोप है कि विश्वास की हत्या भाजपा ने साजिश के तहत करवाई है। वहीं बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

राज्य के जेल मंत्री उज्जवल विश्वास ने टीएमसी विधायक की हत्या के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है।

कौन हैं मुकुल रॉय

मुकुल रॉय टीएमसी के पूर्व सांसद हैं। मनमोहन सरकार में वह रेल मंत्रालय का कार्यभार संभाल चुके हैं। ममता बनर्जी के साथ रिश्तों में आई खटास के बाद उन्होंने पिछले साल भाजपा का दामन थाम लिया था।

शारदा चिटफंड मामले में भी उनका नाम आया था। ममता बनर्जी ने जब रेल मंत्री पद से इस्तीफा दिया था तब मुकुल रॉय को यह कार्यभार सौंपा गया था।

11 जुलाई 2011 को असम में हुए एक रेल दुर्घटना पर प्रधानमंत्री के कहने के बावजूद मुकुल रॉय दुर्घटनास्थल पर नहीं गए थे। जिसके बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें रेल मंत्री पद देने की अनिच्छा ममता बनर्जी से जताई थी, इसके बाद ही दिनेश त्रिवेदी को रेल मंत्री बनाया गया था।