Home > State > Harayana > पहली मुस्लिम शासिका रजिया बेगम की पुण्य तिथि मनाई

पहली मुस्लिम शासिका रजिया बेगम की पुण्य तिथि मनाई

rajiya sultanकैथल [ TNN ] हिंदूस्तान की पहली मुस्लिम शासिका रजिया बेगम की पुण्य तिथि आज लघु सचिवालय स्थित सभागार में मनाई गई। अपने शासन काल में हिंदू साहित्य और दर्शन को बढ़ावा देने के नायाब काम को अंजाम देने वाली रजिया सुल्तान के चित्र पर उपायुक्त श्री एन.के.सोलंकी सहित पुलिस अधीक्षक श्री कुलदीप सिंह यादव, अतिरिक्त उपायुक्त श्री अरविंद मल्हान, एसडीएम श्री नरहरि सिंह बांगड़, कलायत के एसडीएम श्री अश्वनी मैंगी व नगराधीश डा. पूजा भारती सहित सभी अधिकारियों व कर्मचारियों ने माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

उपायुक्त ने भारत की पहली मुस्लिम शासिका के जीवन दर्शन को आज के संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि 12वीं शताब्दी में पैदा हुई रजिया के पिता अल्तमश ने उस जमाने जब लड़कियां पर्दानशी रहा करती थी, बेटी के जन्म को न केवल एक उत्सव के रूप में मनाया था, बल्कि रजिया को पर्दे में न रखकर उसे शासकीय तालीम भी उन्हें स्वयं रजिया के 12 साल की उम्र में दे दी थी। उन्होंने कहा कि रजिया सुल्तान और उनके पति मलिक इ तारूद्दीन अल्तुनिया की इसी नगर में आज के दिन कैथल में ही हत्या हुई थी। रजिया सुल्तान की कब्र यहां विद्यमान है, लेकिन वक्त के थपेड़ों और अनभिज्ञता के कारण ये जर्जर हालत में है। अब इसे सहेजने की प्रक्रिया ग्राम पंचायत के सहयोग से शुरू की गई है। संभवत: इस कब्र को फिर से मूल स्वरूप में लाकर लोगों के आकर्षण का केंद्र इसे बनाया जाएगा। श्री सोलंकी ने कहा कि रजिया सल्तनत काल की महान शासक थी, अल्तमश ने अपनी इस बेटी की काबलियत पर विश्वास करते हुए इसे अपनी उत्तराधिकारणी घोषित कर गद्दी पर बिठाया था।

रजिया पहली खातून थी, जो दिल्ली की राजगद्दी पर बैठी। उसके शासन संभालने के पश्चात तुर्क के अमीर रजिया के विरोध में खड़े हुए और उन्होंने इसके भाई मोहीनुद्दीन बहरामशाह को गद्दी पर बैठा दिया। इस दौरान बठिंडा के गवर्नर अल्तुनिया से रजिया का निकाह हुआ और दोनों दिल्ली की गद्दी हासिल करने के लिए दिल्ली की ओर कूच कर गए। बहरामखां ने उसे रास्ते में ही रोककर समाप्त करने के लिए पंजाब की ओर सेना भेजी। दोनों और की सेनाओं की बीच कैथल में युद्ध हुआ और इसी युद्ध में रजिया और अल्तुनिया मारे गए। रवायत के अनुसार रजिया को इसी स्थान पर दफना दिया था, जिनकी कब्र के निशान अब भी काफी है, जिसे संवारा जाना है। उपमंडलाधीश श्री नर हरि सिंह बांगड़ ने इस मौके पर मौजूद अधिकारियों व कर्मचारियों को अतीत के झरोखों से जोड़ते हुए कैथल की ऐतिहासिक व धार्मिक पृष्ठभूमि से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि राजा हर्षवर्धन के समय कैथल का वैभव चरम पर था और यहां चीनी यात्रियों हयूांगसांग व फाह्यान ने यात्राएं की कलांतर में यहां चंदेलों, खिलजियों, तुगलकों, बलुचों व अफगानों का शासन रहा। प्रसिद्ध आक्रमणकारी मंगोलचंगेजखां आक्रमण करते हुए भारत आया और उस समय अनेक मंगोल भारत में बसे और इसी काल में अनेक सैयद भी कैथल में आकर बस गए और शीघ्र ही यह स्थल विद्यवानों और सलाहकारों का केंद्र बन गया। उन्होंने रजिया सुल्तान के यहां हत्या होने की घटना को कैथल के इतिहास से जोड़ते हुए उनसे जुड़े कई संस्मरण सांझा किए तथा उन्होंने इस पौराणिक शहर की धार्मिक महत्वता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म क्षेत्र कुरूक्षेत्र 48 कोस की परिधि के केंद्र रहे कैथल में अनेकों महाभारतकालीन धार्मिक स्थल हैं, यह कुरूक्षेत्र का मु य हिस्सा है, जहां आज से 5100 वर्ष पूर्व योगीराज कृष्ण ने गीता का अमर संदेश मानव जाति के नाम प्रतिपादित किया था। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

रिपोर्ट :- राजकुमार अग्रवाल

Facebook Comments

Our News Network and website neither have any collaboration and connection directly nor indirectly with “India Today Group/ITG” ,TV Today Network, Channel Tez TV media group .