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नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाले रैकेट का पर्दाफाश

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ग्वालियर – रेलवे ,नेवी, रियल स्टेट, होटल, एजुकेशन सेक्टर में ऊंचे पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों को ठगने वाले दिल्ली के एक रैकेट का पर्दाफाश क्राइम ब्रांच ने किया है। पुलिस ने इस रैकेट के 6 सदस्यों को पकड़ा है।

इस रैकेट ने केंडिटेट को 4 से 6 महीने तक उलझाने के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र देने के साथ-साथ उनका मेडिकल परीक्षण कराने व 3 माह की ट्रेनिंग अपने फर्जी इंस्टीट्यूट में देने की व्यवस्था कर रखी थी। इस रैकेट का मूल दफ्तर दिल्ली व ट्रेनिंग सेंटर कोलकाता में था। ट्रेनिंग के दौरान 5 से 7 हजार के बीच भत्ता भी देते थे। नौकरी लगवाने के नाम पर यह रैकेट 50 हजार से 5 लाख रुपए तक लेता था और रैकेट के हर सदस्य की भूमिका व काम पहले से तय था।

एसपी हरिनारायण चारी मिश्र ने बताया कि 10 जून को थाटीपुर के एक युवक ने शिकायत की थी कि उसके भाई को रेलवे में टीसी की नौकरी लगाने के नाम पर दिल्ली के कुछ लोगों ने 5 लाख रुपए ठग लिए। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए क्राइम ब्रांच को जांच सौंपी गई।

क्राइम ब्रांच की टीम 2 दिन में इस रैकेट तक पहुंच गई। पुलिस ने संजय गुप्ता पुत्र नथिनी गुप्ता निवासी तामकुईराज जिला कुशीनगर यूपी, हरीश पुत्र भंवर सिंह राजपूत निवासी संजय नगर थाटीपुर, नसीम अहमद पुत्र आस मोहम्मद निवासी ननकपुर पुनाहना जिला मेवात हरियाणा हाल एक्सटेंशन सेक्टर-7 दिल्ली, रिंकू पुत्र स्वप्निल कुमार भट्टाचार्य निवासी सुरेश नगर थाटीपुर, रमेश प्रसाद उर्फ नेता चक्रवर्ती निवासी ग्राम थनेल जिला बांदा व मनीष पुत्र हरविलास राजपूत निवासी कर्रा थाना गोधन भांडेर जिला दतिया को पकड़ लिया।

आवेदकों के शैक्षणिक दस्तावेजों की फोटो कॉपी और पासपोर्ट फोटो लेने के बाद संबंधित व्यक्ति को दिल्ली के मुख्यालय में बुलाकर उस कार्यालय में इस तरह प्रदर्शित करते थे। जैसे कार्यालय के सीनियर अधिकारियों से इनके गहरे संबंध हों। इनमें से एक सदस्य सीनियर अधिकारी होने का अभिनय करता था।

आवेदक से नौकरी लगाने के नाम पर तय की गई राशि लेने के बाद उसे फर्जी नियुक्ति पत्र थमा देते थे। उसके बाद किसी अस्पताल के पास की पार्किंग अथवा कमरे में ले जाते और अपने डॉक्टर से मेडिकल परीक्षण कराने के बाद फिट होने का का सर्टिफिकेट दिलवाते थे। नए बैच के लिए नया दफ्तर व ट्रेनिंग के लिए इंस्टीट्यूट चलाने के लिए नए भवन की तलाश करते थे। यह रैकेट ठगी का कार्य पिछले 2 साल से कर रहा है और 100 से अधिक लोगों को ठग चुका है।

क्राइम ब्रांच ने आरोपी के पास विभिन्ना विभागों के फर्जी नियुक्ति पत्र, सील-सिक्के व अन्य सामान बरामद किया है। यह फर्जी नियुक्ति हूबहू असली जैसा लगता है। पुलिस पता लगा रही है कि इन लोगों ने विभागों के असली जैसे फर्जी प्रवेश नियुक्ति पत्र, मेडिकल फॉर्म व सील सिक्के कैसे तैयार किए। इनके पास इनकी नकल कहां से आई। पुलिस इनके बैंक खाते व चल-अचल संपत्ति का भी पता लगा रही है।

 

 

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