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आखिर मालदीव पर क्यों चुप है भारत ?

Ved-Pratap-Vaidik

पिछले तीन वर्षों से मालदीव में गजब की उथल−पुथल मची हुई है लेकिन भारत की भूमिका एक असहाय तमाशबीन की−सी हो गई है। मनमोहन−सरकार हो या मोदी सरकार, यह समझ में नहीं आता कि वे हाथ पर हाथ धरे, क्यों बैठी रहती हैं? मालदीव के उप−राष्ट्रपति अहमद अदीब को पहले गिरफ्तार किया गया और अब उन पर महाभियोग लगाकर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। पूरे देश में आपात्काल थोप दिया गया है। राष्ट्रपति यामीन अब्दुल कय्यूम का आरोप है कि उनके उप−राष्ट्रपति ने उनकी हत्या की साजिश की थी। उन्होंने उनके बोट में बम रखवा दिया था। बम फूटा तो सही लेकिन राष्ट्रपतिजी बच गए। सुरक्षित बच निकले राष्ट्रपति यामीन ने अपने उप−राष्ट्रपति को दबोच लिया लेकिन मुख्य प्रश्न यह है कि यामीन ने आपात्काल की घोषणा क्यों की?

इसका तात्कालिक कारण तो स्पष्ट है। शुक्रवार को सारे विरोधी दल मालदीव की राजधानी माले में जबर्दस्त प्रदर्शन करनेवाले थे। इस प्रदर्शन की मुख्य आयोजक पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद की मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी थी। नशीद को भी राष्ट्रद्रोह के आरोप में 13 साल की सजा मिली हुई है। सारे विरोधी दलों ने संसद में अदीब के महाभियोग का बहिष्कार करके यह बता दिया था कि अब यामीन के खिलाफ वे सब एक हो गए हैं। यदि यह संयुक्त प्रदर्शन हो जाता तो यामीन का अपनी कुर्सी में बने रहना मुश्किल हो जाता। यामीन ने मालदीव में शासन कम चलाया है, वे अपने विरोधियों से ज्यादा निपटते रहे हैं।

पिछले दो साल में यामीन ने सरकार ऐसे चलाई है, मानो वह उनकी बपौती हो। उन्होंने अपने दो उप−राष्ट्रपतियों पर महाभियोग चलाया, दो सुप्रीम कोर्ट के जजों की छुट्टी कर दी, आठ मंत्रियों को घर बिठा दिया, फौज के कई अफसरों को निकाल दिया और पुलिस व गुप्तचर विभाग में भी भारी फेर−बदल कर दिया। लगता है कि मालदीव में उनसे ज्यादा असुरक्षित कोई नहीं है। मालदीव के एक पूर्व राष्ट्रपति, एक उप−राष्ट्रपति, दो रक्षा मंत्री और एक संसद के उपाध्यक्ष जेल में सुस्ता रहे हैं। इस आपात्काल में अब पता नहीं वे कितनों को अंदर करेंगे।

आपात्काल में सारे नागरिक अपने मूल अधिकारों से वंचित कर दिए गए हैं। अब कोई अपना मुंह भी नहीं खोल सकता। अखबार, टीवी चैनल और रेडियो पर कड़े प्रतिबंध लग गए हैं। अमेरिका और ब्रिटेन की कई संस्थाओं ने यामीन के इन तानाशाही कदमों का साफ शब्दों में विरोध किया है। अमेरिका की केंद्रीय जांच एजेंसी ने तो ये तक कहा है कि राष्ट्रपति के बोट में बम−विस्फोट की बात भी बनावटी है। उप−राष्ट्रपति अदीब को यामीन ने इसलिए बर्खास्त किया है कि वे अपने अलावा किसी को भी मालदीव में लोकप्रिय और ताकतवर होता हुआ नहीं देख सकते। उनके उप−राष्ट्रपति अदीब पिछली सरकार में पर्यटन मंत्री थे।

पर्यटन मालदीव की आमदनी का सबसे बड़ा स्त्रोत है और पर्यटन कंपनियों के पैसे के दम पर मालदीव की राजनीति चलती है। पर्यटन के क्षेत्र में अदीब की उपलब्धियां इतनी थीं कि जब यामीन की सरकार बनी तो अदीब को दुबारा वही पद मिल गया। यामीन के राज में अदीब जरुरत से ज्यादा प्रभावशाली हो गए। उप−राष्ट्रपति तो वे बन ही गए थे, वे मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता भी करने लगे। फौज और पुलिस में भी उनकी गहरी पैठ हो गई थी। उन्हें उप−राष्ट्रपति बनाने के लिए यामीन ने संविधान में संशोधन करवाया लेकिन अब यामीन उनसे इतना घबरा गए हैं कि उन्होंने मालदीव को

लेखक :- डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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