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ये कैसा डिजिटल हो रहा देश

khandwaदेश में संचार व्यवस्था के माध्यम से तेज गति देने के लिए 1 जुलाई को डिजिटल इंडिया की सुविधा प्रारंभ की गई है। इस तरह की तेज गति ने कल हमारे शहर के नजदीक यात्रियों की जान की परवाह न करते हुए केवल अपने बस के टाईम केा मिलाने के उद्देश्य रखने वाले कुछ स्वार्थी लोगों की वजह से एक लापरवाह और टाईम के चक्कर में तेज गति से बस चला रहे ड्रायवर ने 25 लोगो की जान लेते हुए इतने ही परिवारों सपनों को ठीक उसी तरह चकनाचूर कर दिया जिस तरह से ट्रक से टकरा जाने के बाद बस और घटना में मारे गए यात्रियों के शरीरों के हुए। उसमें वो भी शामिल है।

इस घटना में मेरी काॅलोनी में रहने वाले सतीश देशमुख दादा भी इस तेज गति का शिकार हुए। रात भर तो उनके शव को जिला चिकित्सालय में रखा गया था । ताकि उनकी पत्नी और दो बेटियों को उनके निधन के बारे में पता नहीं चल सके। लेकिन जब दूसरे दिन याने कि 2 जुलाई को अखबार में उनका नाम देखा तो दूसरे दिन शाम तक उनके घर लौटनें का इंतजार कर रही पत्नी, बच्चे, मां, भाभी का इतंजार रूदन में बदल गया इसके बाद जब एंबूलेंस उनका शव लेकर घर पहुंची सबका बुरा हाल हो गया। एक जरा सी लापरवाही ने एक भरा-पूरा परिवार और उसके सपनों को चकनाचूर कर दिया। सबका कहना है की ओवर टेक करने में हुआ है , तकनिकी तौर पर सोचे की कितनी स्पीड से ओवरटेकिंग की गई होगी तो यह हाल हुए।

खंडवा -इंदौर मार्ग पर आप बच गए तो सुरक्षित वर्ना बसांे के इस टाइमिंग की दौंड में मर गए तो गए। इससे किसी को कुछ लेना देना नहीं बस और बस केवल अपने बस के लिए मिलें परमिट के टाइम को मिलाना है और अपने टाइम पर लौटना इसी की हांय तौबा मची है।

मुझे यह समझ में नहीं आया कुछ वर्ष पहलें खंडवा यातायात विभाग और आरटीओे विभाग ने पहल कर खंडवा, इंदौर, खरगोन और बुरहानपुर जाने वाली बसों के शीशों पर आने जाने का समय , परमिट की संख्या, अवधी पेंट से लिखवाया था तो इसके बाद बाकि बचे टाइमिंग में बसों को परमिट क्यों देना और इस तरह की पहलों को पूरी तरीके से अमल नहीं करना कही इस तरह की घटनाओं को तो नहीं अनजाम दे रहा है या भविष्य में देगा इस बात पर सभी स्तर पर सोचना होगा। किसी परिवार ने अपनी एकलौता पुत्र खोया है ऐसे न जाने कितनों ने क्या खोया होगा।

इस वाक्या पर लिखने का एकमात्र कारण है कुछ दिनों पहले ही जब इंदौर जा रहा था तो उस बस में मात्र 7 से 9 सवारी थी, इस पर कंडक्टर से पूछा की (पत्रकारिता की आदत नहीं छूटती है )ऐसी हालत के क्या कारण है तो उन्होंने बताया भाई साहब आपने देखा 3 मिनिट के अंतराल से बसे छूटी है जबकी पूर्व में इस बस के करीब 10 मिनिट आगे और पीछे तक किसी भी बस को परमिट नहीं था अब तो इन दस मिनिट में करीब तीन बसों को परमिट मिल गया है तो यह हालात हैं। उस बस के ड्रायवर और कंन्डक्ट्रर ने मात्र 5 मिनीट में एक ढाबे पर चार रोटी, चावल और सब्जी खाई तो उनसे पूछा की इतनी तेजी से तो बोले भाई उधर जाकर लौटना है और रात को 12.30 बजेगी तो खाना भी नहीं खा पाएंगे। वही हेल्पर ने अपना खाना बंधवाया तो उससे पूछा भाई तुम कब खाओगे बोला भाई सरवटे पर पांच मिनिट बस खड़ी रहेगी उतनी देर में फंसा लेंगे और चल देंगे। बस इतना ही सुनकर मैं उनकी परेशानी को समझ गया ।

Rahul Mahajan Gurjarलेखक :- राहुल महाजन गुर्जर 

लेखक परिचय :- राहुल महाजन गुर्जर पूर्व में एक प्रसिद्ध समाचार पत्र के बड़े पत्रकार थे

वर्तमान में समाज  सेवा के क्षेत्र काम कर रहे है  

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