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जानिए मनमोहन और चिदंबरम को क्यों दिया जा रहा हैं इस काम का श्रेय

नई दिल्ली: इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को भारत में आर्थिक सुधार और टेक विस्तार का श्रेय दिया। ये बड़ा बयान उन्होंने हाल में सेंट सेंट जेवियर्स कॉलेज में आयोजित लीडरशिप समिट में दिया। उन्होंने कहा कि जब वो 80 के दशक की शुरुआत में अपनी कंपनी की शुरुआत कर रहे थे। तब तकनीकी विस्तार होना बचा था।

उन्होंने आगे कहा कि हम टेलीफोन कनेक्शन प्राप्त करने में सात साल लग गए। इसकी सर्वोच्च प्राथमिकता सरकारी अधिकारियों के लिए थी और दूसरी सर्वोच्च प्राथमिकता रिटायर्ड लोगों के लिए थी। उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि मुझे उस समय सीएम स्टीफन के बारे में एक वाकया याद है, जो उस समय संचार मंत्री थी। कोई उनके पास गया और कहा कि टेलीफोन काम नहीं कर रहा है उन्होंने का कि उन्हें खुश होना चाहिए कि उनके टेबल में एक उपकरण(टेलीफोन) है, क्योंकि टेलीफोन तो मैडम इंदिरा गांधी का भी नहीं करता है।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार के अलावा उनकी कंपनी जब तरक्की कर रही थी, तब ट्रेवल के क्षेत्र की स्थिति भी चिंता करने वाली थी। उन्हें तब कंप्यूटर का आयात करने में तीन साल और एक लाख डॉलर की कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने इसके लिए दिल्ली की 50 यात्राएं की। उस समय विमान का टिकट बहुत महंगा था। उस समय विदेश जाना आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि अधिकांश नौकरशाह ये नहीं समझेंगे क्योंकि उन्होंने अन्य चैनलों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि लेकिन बदलाव आया। इसका श्रेय वो पीवी नरसिम्हा राव, डॉ मनमोहन सिंह, मोंटेक सिंह अहलूवालिया और पी चिदंबरम को देते हैं। ये चारों आर्थिर सुधारों के आर्किटेक्ट थे। उन्होंने सात दिन वो काम किया जो 45 सालों में नहीं हो पाया।

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